महान् लेखक बनने की कंुजी और मोपांसा

प्रसिद्ध फ्रासीसी साहित्यकार  मोपांसा (Maupassant) बचपन से ही लेखक बनने की जिद करने लगा था। तब उसकी समझदार मां अपने परिचित प्रसिद्ध लेखक फ्लोएर्बेट(Flaubert) पास ले गई एवं उनको बताया कि मेरा बेटा लेखक बनना चाहता है। अतः वह आपसे लेखक बनने के सूत्र  जानना चाहता है।
वे उस समय व्यस्त थे। फ्लोएर्बेट ने एक माह बाद बुलाया।
ठीक एक माह बाद बच्चा मोपासां उनके पास पहुँच गया। उन्होने उसे पहचाना नहीं तब उसने अपनी मां का परिचय देकर बताया कि वह लेखक बनने के सूत्र सिखने आया था तब आपने एक माह बाद आने को कहा था।
तब फ्लोएर्बेट  ने टेबल पर पड़ी एक किताब उसे दी और कहा कि इसे याद करके आओ।
मोपासां उस किताब को महीने भर में पूरी तरह याद कर फिर उनके पास पहुँच गया। तब गुरु ने फिर पूछा कि क्या पूरी किताब याद कर लीं।
मोपासां ने कहा-हां कहीं से भी पूछ लिजिए। वह किताब एक बड़ी डिक्शनरी थी।
फ्लोर्बेएट आश्चर्य से उस बालक को देखते रहे फिर पूछा कि खिड़की के बाहर से क्या दिखाई देता है?
बालक ने कहा ‘‘पे़ड’’- कौनसा पेड़-‘‘पाईन का पेड़’’
ओह, ठीक से देखो-‘‘ पास के तीसरे मकान की तीसरी मंजिल से एक लड़की झांक रही है।’’
‘‘और अच्छी तरह देखो’’
तब उसने कहां -‘‘आकाश में चिड़िया उड़ रही है।’’
हां, अब ठीक है।
वह पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं है। वह तीन मंजिला मकान, खिड़की से झाँकती लड़की,, वह आसमान, वह चिड़िया, वे सभी उस पेड़ से जुड़े हुए है। पेड़ कभी अकेला नहीं हो सकता है। इसी तरह आदमी के मामले में उसके आस-पास का समाज, उसकी वंश-परम्परा, उसके नाते-रिश्ते के लोग, उसके दोस्त-यार, इन सबको मिला कर ही वह आदमी है। इस तरह वातावरण का भी योगदान होता है। इस तरह की विस्तृत दृष्टि चाहिए।तब जाकर ही साहित्य बनता है।
उसी दिन से मोपासां ने उन्हें अपना गुरु बनाकर उनके  सूत्रों का अनुसरण कर एक महान्  लेखक बने।
आपके लेखक बनने के सूत्र क्या है?
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5 विचार “महान् लेखक बनने की कंुजी और मोपांसा&rdquo पर;

  1. आदरनिये जैन जी ..
    मैं अभी आपके सामने एक छोटे से पौधे के रूप में हु जबकि आप एक वट-वृक्ष का रूप ले चुके है ..जहा मेरी सोच ख़तम होती है .. वहा से आपकी सोच की शुरुवात होती है . सबसे पहले मेरे हौसला अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत बहुत शुक्रिया ..
    और इस महान लेखक वाली ब्लॉग ने मुझे महाभरत की कहानी याद दिला दी जब अर्जुन द्रोणाचार्य से सीख रहा था …. किसी भी लेखक की कौन सी रचना उसको महान बना देगी ये लेखक भी नहीं जानता .. चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी इसके बहुत बड़े उदाहरण है जिनकी सिर्फ एक कहानी ” उसने कहा था ” ने उनको महान लोगो की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया ..
    मैंने अभी अभी लिखना शुरू किया है … और मेरे लेखन के शुरुवात में ही आप जैसे लोगो का आशीर्वाद मिला .. मैं ये आशीर्वाद , स्नेह और आप लोगो की छत्र-छाया बराबर चाहूँगा ..

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