ब्लोगिंग में सफलता का महामन्त्रः सत्यं शीवं सुन्दरं

साहित्य में  सफलता प्राप्ति  का जो मन्त्र है वही ब्लोगिंग में सफलता पाने का मन्त्र है।साहित्य समाज का दर्पण है। मात्र सत्य से ही साहित्य नहीं रचा जा सकता है।केवल सही बात करने से ही समझ में नहीं आती है। सत्य को प्रतिष्ठित करने के लिए उसको सुन्दर व ग्राह्य बनाना पड़ता है। लेखन में यदि सत्य को सुन्दर बना कर न लिखा तो पाठक उसे प्यार कैसे करेगा? इसलिए सत्य में सौन्दर्य की स्थापना करनी पड़ती है। सत्य में जब सौन्दर्य की स्थापना होती है तब साहित्य कला का रुप धारण कर पाता है।
अपनी कृत्ति ‘‘उठो जागो’’,सफलता सम्बन्धी रचना है।यह एक कड़वा काढा है, यधपि गुणकारी है लेकिन बीमार ही उसे पीता है। कथा साहित्य हलूआ है, खाने में मीठा लगता है । सफलता सम्बन्धी किताबें रुखी होती है, उनमें रस नहीं होता।इसलिए उसे निरन्तर पढ़ा नहीं जा सकता है।जबकि साहित्य में रस होता है, भाव होते है। मनुष्य भावनाओं से चलता है। साहित्य का आधार भाव है। अतः उसे अधिक लोगो तक पहुँचाने उसमें सौन्दर्य का, कला का, शैली का, रहस्य का, वर्णन का, सटिक शब्दों का रस भरकर उसे भाव प्रधान बनाना पड़ता है।
साहित्य में मन को, दिल को छूने की कला होती है। इसलिए इसे पढ़ने में मजा आता है।इसलिए ब्लांग कथा साहित्य की तरह लिखे।
साथ ही सत्य में सौन्दर्य का मेल होने से उनका मंगल रुप बनता है। यह जन कल्याण कारी बनता है। साहित्य के इन तीनों
सिद्धान्तों को ही सत्यं,शिवं,सुन्दरं कहते हैं। ‘‘इन तीनों सुत्रों को ध्यान में रख कर ब्लोग लिखे तो पाठकों की संख्या बढ़ती है।
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5 विचार “ब्लोगिंग में सफलता का महामन्त्रः सत्यं शीवं सुन्दरं&rdquo पर;

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