सफलता का मंत्र : प्रबल इच्छा से बिलगेट्स बनते है

प्रबल इच्छा क्या है ? प्रबल इच्छा का तात्पर्य उस दृढ़ निश्चय से है जो हमें किसी लक्ष्यप्राप्ति के लिए करता होता है। यह लक्ष्य शक्ति, ओहदा, धन या ऐसी ही अन्य कोई वस्तु हो सकती है। कुछ बड़ा पाने या करने के लिये महत्त्वाकांक्षा अनिवार्य है। जीवन में कुछ बड़ा करने का दृढ़ निश्चय।

एक स्कूली छात्र ने साॅफ्टवेयर की कम्पनी शुरू की – माइक्रो साॅफ्ट। इसी बीच इस छात्र ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। जब वह अपने स्नातक पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में था, कम्पनी ने बहुत बड़ा लाभ कमाना शुरू किया । उसकी प्रबल इच्छा थी कि वह अरबपति बने। उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि कम्पनी का काम बढ़ गया था। उसने अपने लक्ष्य को पहचाना और अपने जीवन के महत्त्वाकांक्षी कार्य को बीस वर्ष में पूरा कर लिया। उसकी प्रतिदिन आय वर्ष 1998 में आठ सौ करोड़ थी। आज वह इस धरती का सबसे धनी व्यक्ति है। कौन है वह महान् व्यक्ति ? —- वह बिलगेट्स है।

क्या प्रबल इच्छा, उत्साह एवं साहस के अभाव में तेनसिंह और हिलेरी एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने में सफल हो पाते?

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प्रबल इच्छा की सफलता प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका

18 विचार “सफलता का मंत्र : प्रबल इच्छा से बिलगेट्स बनते है&rdquo पर;

  1. बहुत ठीक कहा आपने … पर ये दृढ इच्छा आये कहाँ से …
    कोई शराबी पडा था पस्जिद की सीढ़ियों पर … मौलाना ने देखा तो बोले .. बेटा कुछ काम धाम करो .. यूँ ही पड़े हो … शराबी बोला काम धाम करने से क्या होगा …
    ….. पैसे आयेंगे..,..
    …फिर …..
    फिर पैसे होंगे तो तुम्हारी अच्छी शादी होगी
    …फिर …..
    फिर शादी होगी तो बच्चे होंगे
    बच्चे बड़े हो कर तुम्हारा सहारा बनेंगे
    …… फिर ……
    फिर ज़िंदगी चैन से कटेगी … मस्ती से रहना
    …….. बस …….. इतनी झंझट क्यों करना
    मै तो अभी भी बहुत मस्ती में हूँ
    … मौलाना जी … मूड खराब कर दिया आपने तो
    …….
    …..???

    वो कहते हैं इश्क से क्या फायदा
    और हम कहते हैं फायदे से क्या फायदा

  2. प्रबल इच्छा से हर कार्य हो यह कहना बिल्कुल शत प्रतिशत सही है गलत होगा ? क्योंकि मैं यह मानता हूं कि दृढ इच्छा रखना सही है किंतु इच्छाआं के भरोसे रहना कतई उचित नहीं है। हर किसी की इच्छा ेएसे पूर्ण हो सके नहीं कहा जा सकता।

  3. अमेरिका के इस दिग्गज कारोबारी ने कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रांति कर आज दुनिया के 90 प्रतिशत कंप्यूटरों पर अपना आधिपत्य कर लिया है। आज दुनिया भर के लोग माइक्रोसॉफट विंडोज सॉफ्टवेयर का ही उपयोग करते हैं। उन्होंने कंप्यूटर को एक आम आदमी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। बिल गेट्स ने 20 साल की उम्र में 1975 में अपनी कंपनी माईक्रोसॉफ्ट की शुरुआत की थी, और इसके लिए उन्होंने हॉर्वर्ड की अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी। उनके साथ उनेक दोस्त पॉल एलेन भी थे जो उस समय 22 साल के थे। दोनों ने सबसे पहले अल्टेयर 8800 माइक्रो-कंप्यूटर के लिए बेसिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज लिखी। 3 साल तक अथक मेहनत करके दोनों ने 10 लाख डॉलर की कमाई की। बिल गेट्स 1975 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बन गए। इसके बाद सन् 2000 में उन्होंने इस पद पर हॉर्वर्ड कॉलेज में उनके सहपाठी रहे स्टील बामर को बिठा दिया। अपनी व्यापारिक कुशलता और कंप्यूटर के भविष्य की समझ से उनका कारोबार दिन दूना और रात चौगुना बढ़ता गया और 1994 तक आते आते वे अमरीका के सबसे धनी लोगों में शुमार किए जाने लगे। उस समय उनके पास तब तक 9.35 अरब डॉलर की संपत्ति हो गई थी।
    बिल गेट्स ने 1994 में ही अमेरिका के डलास में रहने वाली मेलिंडा में शादी की। शादी के बाद 1995 में बिल गेट्स 12.9 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए। बिल गेट्स 2005 में जब भारत आए तो यहाँ उन्होंने उन्होंने 1.7 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। जुलाई 2008 में बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट का अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वे अब व्यापारिक कमकाज छोड़कर मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा चलाई जा रही परमार्थिक योजनाओं से जुड़े कामों पर ध्यान देंगे।
    यह फाउंडेशन स्वास्थ्य और विकास से जुड़े कामों को लेकर दुनिया भर में सक्रिय है। इस फाउंडेशन को हर साल कम से कम 1.5 अरब डॉलर का दान मिलता है, और सबसे ज्यादा दान बिह गेट्स ही देते।
    कंप्यूटर की दुनिया में बिल गेट्स का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

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