प्रबल इच्छा: सफलता का प्रारम्भिक सोपान

प्रबल इच्छा की सफलता प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका

जल को वाष्प में परिवर्तित करने के लिये उसे 1000 सेन्टीग्रेड तक गरम करने पर ही परिणाम मिलता है। जल 1000 सेन्टीग्रेड पर ही उबलता है और तब वाष्प में परिवर्तित होता है। आवश्यक डिग्री तक गर्म नहीं करने पर ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसी भांति, इच्छा की तीव्रता का भी अपना महत्त्व है।

साधारणतय मात्र इंच्छा या कामना अपेक्षित परिणाम नहीं देते हैं। कार्य करने की या लक्ष्यप्राप्ति का प्रबल इच्छा ही सफलता का बीजारोपण है। प्रबल कामना ही विकसित होकर वास्तविक स्वरुप ग्रहण करती है। विशाल वृक्ष की संभावना छोटे से बीज में ही छिपी होती है।


थाॅमस अल्वा एडिसन एक गरीब लड़का था। बाल्यकाल से ही उसमें वैज्ञानिक बनने की तीव्र कामना जन्म ले चुकी थी। उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उसने सभी मुसीबतों पर विजय प्राप्त की और लगभग 1093 आविष्कार किये। वह 19वीं शताब्दी का मात्र बहुत बड़ा वैज्ञानिक ही नहीं था बल्कि अपने समय का सबसे धनाढ्य व्यक्ति भी था। जो-कुछ आप सोचते हंै, कल्पना करते हैं, देखते हैं, उसे वास्तव में प्राप्त कर सकते हैं। पहले सपने संजोयें, फिर उन्हें साकार करें

हरियाणा के एक पिछड़े गांव में जन्म लेकर कपिलदेव विश्व प्रसिद्ध ‘क्रिकेट स्टार’ बना। यदि वह इस स्तर तक पहुँच सकता है तो आप क्यों नहीं अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते ? निश्चय ही ऐसा हो सकता है।

3 विचार “प्रबल इच्छा: सफलता का प्रारम्भिक सोपान&rdquo पर;

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