व्यक्ति को बदलने में अनुभव की भूमिका

अनुभव कोष की बढ़त ही आपकी बढ़त

अनुभव कोष सबसे बडी पँूजी हैं। अनुभव द्वारा ही हम बदलते हैं। हम अपनी पुरानी आदतों तक को नए अनुभव कर उन्हे बदल सकते हैं। हम अपनी धारणाओं,विचारंो व जीवन को अनुभव द्वारा बदल सकते हैं।

एक मां का बेटा उसको छोड़ किसी और की कोख से जन्म नहीं ले सकता हैं । ऐसे ही अनुभव आपके लिए कोई दूसरा प्राप्त नहीं कर सकता हैं एवं दूसरों के अनुभव से आप लाभान्वित नहीं हो सकते हैं । दूसरों के बहकावे में मत आओं । स्वयं सत्य को परखो । अर्थात् अपने अनुभवों की कसौटी पर जांचों । स्वयं के मार्ग खोजों और उसी अनुसार चलो । अपने अनुभवों को महत्व दो, उन्हैं सत्य मानो । अन्यत्र कहीं पढ़ा सुना संकेत हो सकता है, सत्य नहीं । न शास्त्र, न शब्द, न कहानी, न वचन सत्य हैं आपके अनुभव ही प्रमाण हैं । शास्त्र एवं स्मृति मृत होते है, अनुभव प्रमुख हैं ।

फीलिंग को महत्व दो । उसके प्रति सचेत हो व होशपूर्ण रहेा । अनुभव से ही रूपान्तरण सम्भव हैं । परिवर्तन मानसिक क्रिया नहीं हैं । अनुभवों के प्रति साक्षी ही सच में बुद्धिमान अर्थात् प्रज्ञावान बनाता हैं । जब आप अनुभव करते हैं तब स्व में होता। जब चर्चा कर रहे होते है तो स्व से दूर होते हैं । प्रतिक्रिया करना स्व को खोना हैं ।

जैसा कि भगवान बुद्ध ने लिखा है कि अप्प दीपो भव अर्थात अनुभवों के सहारे चलो, गांठ की अक्ल से कार्य करो, खुद अपनी रोशनी को प्रमाण मानो । अपने मार्गदर्शक स्वयं बनो । अनुभवों की पूंजी सबसे बड़ी होती है । यह सदैव आपके साथ रहती हैं । अनुभवों से आपकी क्षमता बढ़ती हैं । इस पर सरकार कर नहीं लगा सकती हैं । इसे चोर उच्चके छीन नहीं सकते हैं। परिजन इसको हथिया नहीं सकते । कोई व्यक्ति इसमें से हिस्सा नहीं छीन सकता हैं । दर्शन शास्त्र के जाने माने प्रोफेसर व्यास तो बार बार अपने अनुभवों को बढ़ाने की बात करते हैं । उनके अनुसार अपने अनुभव कोष की बढ़त ही आपकी बढ़त हैं । अनुभव के उपरान्त भी आपकी शंका बनी रहती है यह सबसे बड़ी बीमारी हैं । जब आप एक बार फाइनल समझ लो तो उसी पर डटे रहना । विचार दुबारा कर द्वन्द्ध के जाल में न फंसना । समझ के तल पर स्पष्टतः समझ कर न स्वीकारना हमारा रोग हैं ।

आपका अनुभव दूसरे किसी भी दुनिया के व्यक्ति से अधिक महत्व रखता हैं । अपने अनुभव को सर्वोच्च प्राथमिकता देवें । दूसरे किसी महान व्यक्ति के कथन से अपने अनुभव की मत अनदेखी करो ।


2 विचार “व्यक्ति को बदलने में अनुभव की भूमिका&rdquo पर;

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