शास्त्रीय संगीत का आनन्द कैसे ले?

संगीत रस सुरस मम जीवनाधार

गत रविवार पण्डित बिरजू महाराज का कथक नृत्य देखा।वहाँ पर शास्त्रीय कलाओं को जानने का मौका मिला।

हमारे शास्त्रीय संगीत के तीन रूप हैं।

1 स्वर संगीत जो आलाप व सुर से जुडा हैं,जो गायकी पर आधारित हैं। प0 जसराज ,भीमसेन जोशी।

2 वाद्य संगीत वह है जो वाद्य यन्त्रों से बजाया जाता हैं। यह ताल पर आधारित हैं। प0 रविशंकर सितारवादक ,बिस्मील्ला खान -शहनाईवादक ।

3 नृत्य यह शरीर की भाव दशाओं व गति को दर्शाता हैं।वैसे यह तीनो अलग अलग व तीनो साथ होते हैं।सितारादेवी,सोनल मानसिहं

ज्यादातर लोग शास्त्रीय संगीत से दूर भागते है यह मानकर कि यह हमें समझ में नही आता हैं। कला कला है, इसको समझने की जरूरत नहीं हैं।इसका अनुभव करो, इससे स्वयं के भीतर स्वतः ही रस उत्पन्न होते हैं। ये रस स्त्रावित होकर स्वतः आपको तरोताजा करते है,उदात्त बनाते है ।

ज्योही संगीत आप सुनेगें- कान व मस्तिष्क द्वारा आप तक पंहुचेगा, इसके भीतर एक क्षमता होती है जो आपको भाएगी। क्योंकि यह आपके भाव जगत को छुएगा व उसे बढाऐगा। स्वयं को सहज छोड दे । विचारो में व समझने के फेर में न पडे । स्वयं वहाँ अनुपस्थित न हो ,अर्थात विचार में न डूबे। हम भोजन करते है तो स्वाद लाने कुछ करते है क्या ? स्वतः आनन्द आने लगता हैं।हमारे भीतर संगीत को समझने की वैसे ही सहज क्षमता होती हैं।संगीत आपके भीतर फैलने लगेगा, रस देने लगेगा ।बस वहाँ आप अपने को उपस्थित रखे ।शेष सब स्वतः होता जाएगा।

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3 विचार “शास्त्रीय संगीत का आनन्द कैसे ले?&rdquo पर;

  1. શ્રીમાન, મારે જાણવુ છે કે ખેતીવાડીમા કયા કયા પાકમા શાશ્ત્રિય સગીત વગાડી શકાય છે.(ડીવિડિ,થી યા મોબાઈલથી) અને તેનાથી કેવો લાભ થાયછે..તે મારે જાણવુ છે…

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