जीवन जीने की कला: चाय पीने से कैसे सीखे?

चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ?

जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई जाती हैं।चाय पीते हुए उसका उत्सव मनाओ। चाय का पूरा लुत्फ उठाओ। चाय बनाने तक को देखो। धीरें-धीरें हर चीज करों।  बर्तनों तक का स्पर्श अनुभव करो । चाय की महक महसूस करो व माहोल के साथ तादात्मय व सजगता रखो । संवेदन शीलता को फैलने दो। सजगता के साथ चाय का स्वाद लो।ं अपनी इन्द्रियों द्वारा होने वाली प्रतिक्रियाओं के प्रति सजग होओं। यह स्वयं को जगाता हैं।
चाय की चुस्की धीरे से लो ।  उसको आपके भीतर फेल जाने दो , उसकी मिठास , महक व कषैलेपन को देखो । उसके ज्ञाता-दृष्टा बनो। विचारो को  अन्यत्र  जाने दों,साथ ही उनका अवलोकन करते रहो । इससे आपके भीतर लीला भाव बढेगा।  तुम पुरे वहा उपस्थित रहो। चाय बनाना व पीना एक ध्यान बनाओं। यह घटना जब दिव्य होगी तभी आपका जीवन दिव्य होगा । तुच्छ व्यक्ति, छोटी घटनाओ से  नही बल्कि छोटी घटनाओं के प्रति लापरवाही से तुच्छ बनता है। प्रत्येक घटना को अति सुन्दर,भव्य व दिव्य मानो, आपके भीतर सुन्दरता , महानता, दिव्यता इस बहाने प्रकट होगी ।इसी से जीवन का रहस्य प्रकट होगा।
चाय पीने के आपके क्या अनुभव हैं?

चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ?जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई जाती हैं।चाय पीते हुए उसका उत्सव मनाओ। चाय का पूरा लुत्फ उठाओ। चाय बनाने तक को देखो। धीरें-धीरें हर चीज करों।  बर्तनों तक का स्पर्श अनुभव करो । चाय की महक महसूस करो व माहोल के साथ तादात्मय व सजगता रखो । संवेदन शीलता को फैलने दो। सजगता के साथ चाय का स्वाद लो।ं अपनी इन्द्रियों द्वारा होने वाली प्रतिक्रियाओं के प्रति सजग होओं। यह स्वयं को जगाता हैं।  चाय की चुस्की धीरे से लो ।  उसको आपके भीतर फेल जाने दो, उसकी मिठास , महक व कषैलेपन को देखो । उसके ज्ञाता-दृष्टा बनो। विचारो को  अन्यत्र  जाने दों,साथ ही उनका अवलोकन करते रहो । इससे आपके भीतर लीला भाव बढेगा।  तुम पुरे वहाॅ उपस्थित रहो। चाय बनाना व पीना एक ध्यान बनाओं। यह घटना जब दिव्य होगी तभी आपका जीवन दिव्य होगा । तुच्छ व्यक्ति, छोटी घटनाओ से  नही बल्कि छोटी घटनाओं के प्रति लापरवाही से तुच्छ बनता है। प्रत्येक घटना को अति सुन्दर,भव्य व दिव्य मानो, आपके भीतर सुन्दरता , महानता, दिव्यता इस बहाने प्रकट होगी ।इसी से जीवन का रहस्य प्रकट होगा।

चाय पीने के आपके क्या अनुभव हैं?

4 विचार “जीवन जीने की कला: चाय पीने से कैसे सीखे?&rdquo पर;

  1. This write-up is excellent. To corelate tea with meditation is a useful and practical way for spiritual awareness. Now, men should give up alcohol. They should enjoy with Tea. It will be a revolution for the betterment of human life.
    My humble request, please, write on Vegetarianism to save the earth. It is need for the time to combat with climate change, terrorism etc.
    Thanks.- Dr. Dhing

  2. आलेख बढ़िया लगा, खासकर इसलिए कि चाय पीना एक सहज बार-बार की जाने वाली दैनिक क्रिया है जिसे लोग महत्व देना तो दूर, ध्यान भी नहीं देते। यदि जीवन की शैली में आनन्द इतना भीतर तक समो लिया जाए, तभी जीवन उत्सव बनेगा।
    वाह!

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