ब्लाॅग पर ट्राफिक और टेढ़ी खीर

ब्लाॅग पर ट्राफिक बढ़ाना टेढ़ी खीर है। इ़स पर मुझे टेढ़ी खीर  नामक एक कहानी  याद आती है।
जीवन भर हम सफ़लता के लिए लालायित रहते हैं  परन्तु कुछ ज्ञात-अज्ञात कारणों से हम आंशिक सफ़लता ही प्राप्त कर पाते हैं। ऐसा ही एक कारण है “नासमझी”।

दो गरीब लड़के थे, जो भीख माँगा करते थे। उनमें से एक जन्मान्ध था और दूसरा उसे सहयोग किया करता था।
एक दिन अन्धा लड़का बीमार हो गया। उसके साथी ने कहा “यहीं ठहरो और विश्राम करो। मैं जाकर हम दोनों के लिए माँग कर लाता हूँ।’’
उस दिन, उस लड़के को बहुत स्वादिष्ट भोजन “खीर” भीख में मिली। परन्तु उसके पास लाने हेतु कोई बर्तन न था इसलिए उसने वहीं सारी खीर खा ली।
लौटकर उसने अपने अन्धे साथी से कहा, ‘‘ मुझे क्षमा करना भाई! आज मुझे भीख में खीर मिली थी। परन्तु मैं उसे तुम्हारे लिए न ला सका, क्योंकि उसे लाने के लिए मेरे पास बर्तन नहीं था।’’
अन्धे लड़के ने पूछा, “यह खीर क्या होती है ?” “अरे यह सफ़ेद होती है, दूध सफ़ेद होता है।” अन्धा लड़का समझा नहीं सका। चूंकि वह जन्म से अन्धा था।  उसने पूछा “यह सफ़ेद क्या होता है?” “तुम नहीं जानते, सफ़ेद क्या होता है?”
“नहीं! मैं नहीं जानता।”
“यह काले का विलोम होता है।”
उसने पूछा, “अच्छा, यह काला क्या होता है।” वह यह भी नहीं जानता था कि काला क्या होता है।
‘‘अरे, समझने की कोशिश करो, सफ़ेद को।” अन्धा लड़का बिल्कुल नहीं समझ पाया कि सफ़ेद क्या होता है। अतः उसके मित्र ने इधर-उधर दृष्टि दौड़ाई और ऐसा संकेत ढूँढने की कोशिश की कि जिसका उदाहरण देकर अंधे मित्र को “सफ़ेद” के बारे में समझा सके।  इतने में उसे एक सफ़ेद बगुला दिखाई दिया। उसने बगुले को पकड़ कर अन्धे मित्र से छुआते हुए समझाया कि सफे़द इस चिड़िया जैसा होता है।
अन्धे ने बगुले को छुआ, उस पर हाथ फिराया और कहा, “अरे यह तो मुलायम है। सफ़ेद मुलायम होता है।”
“नहीं, नहीं, इसका मुलायम होने से कुछ लेना देना नहीं है। सफ़ेद, सफ़ेद होता है। समझने की कोशिश करो।“
“परन्तु तुमने कहा कि ‘सफ़ेद’ इस बगुले जैसा होता है।” यह कहते हुए अन्धे लड़के ने बगुले पर फिर से हाथ फिराया – आगे से पीछे, ऊपर से नीचे – और कहा “अच्छा, यह टेढ़ा होता है।” अब समझा, खीर टेढ़ी होती है।
अन्धा लड़का तब भी समझ नहीं पाया कि “सफ़ेद” क्या होता है। क्योंकि, उसे यह समझने, जानने के लिए जिन चक्षुओं की आवश्यकता थी, वह दृष्टि उसके पास नहीं थी।
इसी भाँति अन्धे लड़के की तरह हम कई बार जीवन को सही रूप से समझ नहीं पाते, जबकि हम हमेशा सफलता-प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहते हंै।
तथ्यों पर आधारित हमारी समझ का एक स्तर होता हंै। समस्या वहाँ खड़ी होती है जहाँ हम सोचतें हंै कि हम सही है,ं जबकि कई बार ऐसा होता नहीं है। ऐसी स्थिति में हम सोचते हैं, कठोर प्रयास करने पर भी हमें सफलता नहीं मिल रही है। हम लक्ष्य-प्राप्ति के लिए क्या करें ?

इस उत्तर की खोज आपको अपने ब्लाग पर ट्राफिक बढाएगी।

5 विचार “ब्लाॅग पर ट्राफिक और टेढ़ी खीर&rdquo पर;

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