सफलता का व्यावहारिक मन्त्र -सकारात्मक सोच

सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। यह सर्व कल्याणकारी मंत्र है। मेरी शान्ति, सन्तुष्टि, तृप्ति और प्रगति का अगर कोई प्रथम पहलू है, तो वह सकारात्मक सोच ही है। सकारात्मक सोच ही मनुष्य का पहला धर्म  है  और यही उसकी आराधना का बीज मंत्र है।

सकारात्मक सोच का स्वामी सदा धार्मिक ही होता है। सकारात्मकता से बढ़कर कोई पुण्य नहीं और नकारात्मकता से बढ़कर कोई पाप नहीं।, सकारात्मकता से बढ़कर कोई धर्म नहीं और नकारात्मकता से बढ़कर कोई अधर्म नहीं। कोई अगर पूछे कि मानसिक शान्ति और तनाव मुक्ति की दवा क्या है, तो सीधा सा जवाब होगा – सकारात्मक सोच।  अनगिनत लोगों पर इस मंत्र का उपयोग किया गया है और आज तक यह मंत्र कभी निष्फल नहीं हुआ है। सकारात्मक सोच का अभाव ही मनुष्य की निष्फलता का मूल कारण है।

24 विचार “सफलता का व्यावहारिक मन्त्र -सकारात्मक सोच&rdquo पर;

  1. सफलता का यही एकमात्र सूत्र है। सकारात्‍मक व्‍यक्ति केवल क्रिया करता है लेकिन नकारात्‍मक व्‍यक्ति प्रतिक्रिया करता है। श्रेष्‍ठ विचार, बधाई।

  2. मेरी शान्ति, सन्तुष्टि, तृप्ति और प्रगति का अगर कोई प्रथम पहलू है, तो वह सकारात्मक सोच ही है। सकारात्मक सोच ही मनुष्य का पहला धर्म है और यही उसकी आराधना का बीज मंत्र है।

    पर सकारात्मक सोंच भी विवादित है.जहाँ त्यागी को देने, भला करने के प्रयासों में सकारात्मकता दिखती हैं वहीँ लोभी को और पाने के गलत सही सब तरह के प्रयासों में……………..

    लेख अच्छा आयर सकारात्मक है.

    बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    http://www.cmgupta.blogspot.com

  3. सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।sach kaha aapne nice post,badhaai aapko . “ब्लोगर्स मीट वीकली {३}” के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

  4. सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।sach kaha aapne nice post,badhaai aapko.

    / ब्लोगर्स मीट वीकली (३) में सभी ब्लोगर्स को एक ही मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है / आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ कोब्लॉगर्स मीट वीकली (3) Happy Friendship Day में आप आमंत्रित हैं /

  5. सकारात्मक सोच से ईन्सान बदल जाता है.मान लीजिऐ कोइ व्यक्ती किसी बैंक को को लूटने के लीए सकारात्मक नजरीये से सोच रहा है,
    क्या वह व्यक्ती ऊस बैंक को लुट सकता है।

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