मेरा नमस्कार: अर्थ, भावार्थ एंव प्रयोजन

लोक व्यवहार की चाबी

नमस्कार मे जादू है। नमस्कार संबन्धो का द्वार है। नमस्कार का अर्थ अभिवादन है। यह एक दुसरे से मिलने पर किया जाता है। यह संस्कृत से निकला  हुआ शब्द है। यह संस्कृत के नमः, ओम एंव कार से मिलकर बना है। नमस्ते नमस्कार का अनौपचारिक रूप है। नमस्ते शब्द संस्कृत के नमः एंव ते   शब्द से मिल कर बना है जिसका अर्थ होता है कि आपको नमन करता हूँ।
इसका अर्थ है कि मै आपके भीतर बैठी दिव्यता एंव अच्छाई को नमन करता हूॅ। मेरे भीतर की दिव्यता आपके भीतर विराजमान दिव्यता का सम्मान करती है। नमस्कार स्वागत एंव सम्मान देने का गेष्चर है। इसमे आपका बड़प्पन है एंव विनम्रता झलकती है। स्वयं को भी नमस्कार करे। नमस्कार आपका परिचय भी खुद से कराता है जहां संचित रहती है अनलिमिटेड एनर्जी। एक छोटा सा नमस्कार आपको दूसरो से अधिक सक्षम और प्रतिभाशली बनाने की क्षमता रखता है।श
जय श्री राम, प्रणाम, हैलो, जय माता दी , सलाम, आदि नमस्कार के ही अवतार है। इनमे षब्दांे का कुल मिलाकर भावार्थ समान ही है। हाथ मिला कर, हाथ जोड कर, हाथ उॅचे करे, गर्दन झुकाकर, मुस्कुरा कर आदि तरीको से भी नमस्कार किया जाता है।

’’आप की  शरण मे हाजिर है’’ ’’आदेश   दीजिए’’ ’’हम प्रसन्न है’’ या ’’हम पर कृपा कीजिए’’ इस प्रकार का भी कुछ अर्थ इस शब्द से निकलता है। कालोनी के सज्जन को रोज नमस्ते कर अपना बनाया जा सकता है। अस्पताल मे गुड मोंरनिग डा. साब कहना आता है तो लाइन छोड़ का आप कुर्सी पर बैठ सकते है। फिस तो सभी को देनी है। उसमे भी अधिक डा. को अपना बनाना है। तो नमस्कार मन्त्र का प्रयोग खुब करे।रूस की क्रान्ति के सूत्र धार लेनिन सबसे पहले व्यक्ति को देखते ही उसे नमस्ते करते थे, उनके अनुसार पहले नमस्कार करने वाला सामने वाले का दिल जीतता है। वह एसा अवसर खोना नही चाहते थे। अतः वे नमस्कार करने मे पहल करते थे।  अर्थात जो पहले नमस्कार करता है वो जीतता है। नमस्कार की विधि सम्बन्धो की प्रगाढ़ता पर निर्भर है। नमस्कार दूसरो की स्थिति और मन के सोच के अनुसार किया जाता है।

नमस्कार करना एक कला है। इसमे पारंगत होने विवक, मुस्कराहट और आत्मविष्वास चाहिए।

नमस्कार क्यो किया जाता है?

अभिवादन का महत्व किससे छिपा है। प्रत्येक व्यक्ति का अहम है। उसको सहलाने के लिए नमस्कार सबसे प्रथम हथियार है। नमस्कार द्वारा हम अपनी ओर दूसरो का ध्यान खीचते है। दूसरा व्यक्ति अपनी व्यस्तता मे नमस्कार से अपनी हाजरी भर लेता है। यह पूर्व परिचय का भी संकेत है।

यह स्पश्टतः दूसरे व्यक्ति को महत्व देने के लिए किया जाता है। नमस्कार करने मे कन्जुसी करने वाला लोक व्यवहार नहीं जानता है। अपना काम प्रेम से निकलवा सकता है।

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