मैंरे आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत :डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग

मैं अपने आदर्शें डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग के बारे में चर्चा करना चाहूंगा, जिनसे मैं अपने कमजोर क्षणों में आत्मविश्वास पाता हूं। हर व्यक्ति का कोई अपना प्रेरणा स्रोत, आदर्श, धर्म की भाषा में कहें तो गुरू होना चाहिये। जिससे वह अपना तार जोड़ सके, जिससे व्यक्ति को सम्बल, हिम्मत एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। अपने प्रेरणा स्रोत के जीवन प्रसंगों से अपनी परिस्थिति की तुलना कर आत्मविश्वास बढ़ा सके।

Stephen Hawking
Stephen Hawking

डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग 21 वर्ष की उम्र से दी मोटर न्यूरोन डिजीज के शिकार हैं। यह लकवे से भी अधिक खतरनाक बीमारी है। यह रोग व्यक्ति की शारीरिक शक्ति को धीरे-धीरे कमजोर करता जाता है। सभी अंग धीरे-धीरे कमजोर होते जाते हैं, कार्य करना बन्द कर देते हैं। हाॅकिंग विगत 40 वर्षों से व्हील चेयर में कैद हैं। चलने-फिरने में असमर्थ हैं। हाथ-पांव हिलना-डुलना तक बन्द कर चुके हैं। हाॅकिंग 26 वर्षों से बोल नहीं सकते हैं। आज वे स्पीच सिन्थेसाइजर की मदद से बोलते हैं। जिसको उनके लिये एक कम्पनी ने विशेष रूप से तैयार किया है। उनकी व्हील चेयर से एक लेप-टाॅप जुड़ा हुआ है। आत्मविश्वास एवं इच्छाशक्ति से इस व्यक्ति का कार्य नहीं रुका है। अंग क्षीण हो गये लेकिन मानसिक शक्ति पर आधिपत्य आज भी बना हुआ है।
हाॅकिंग ने आइन्स्टाइन के सापेक्षता सिद्धान्त को क्वान्टम सिद्धान्त के साथ मिलाया एवं बताया कि ब्रह्माण्ड की संरचना किस प्रकार हुई। दोस्तों, कितने आश्चर्य की बात है कि जिस व्यक्ति की शरीर की संरचना ही गड़बड़ा गयी, वह व्यक्ति ब्रह्माण्ड  की संरचना की खोज कर रहा है।
आपका शोध आइन्स्टाइन के स्तर का है। दुनिया के नम्बर एक वैज्ञानिक हैं। समस्त विश्व में विज्ञान एवं ब्रह्माण्ड के रहस्य पर व्याख्यान देने जाते हैं।
जनवरी, 2001 में स्टीफन हाॅकिंग भारत पधारे थे तब टाइम्स आॅफ इण्डिया वालों ने उनका साक्षात्कार ‘‘ईश्वर डोर नहीं खींचता’’ के नाम से छापा था, जिसमें पत्राकार ने जब पूछा, ‘‘आप बीमारी के बाद कैसा महसूस करते हैं ?’’ तो उत्तर लम्बा नहीं था, ‘‘मैं जितना सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी सकूं उतना प्रयत्न करता हूं। मुझे अपनी स्थिति की चिन्ता नहीं है। जो कार्य मैं नहीं कर सकता उसके लिये पछतावा भी नहीं है। मैं होनी को स्वीकार कर सकता हूं। अभिशाप को वरदान मान लिया। बीमारी का ज्ञान होते ही मैंने अपनी सीमित उम्र मान कर कार्य पर ध्यान दिया। इससे मेरा मस्तिष्क एकाग्र हुआ व कार्य में तेजी आई। बीमारी की घोषणा से पूर्व मेरा जीवन आज की अपेक्षा अच्छा नहीं था। तब मैं बोर होता था व अव्यवस्थित जीवन जी रहा था। अब मैं पहले की अपेक्षा अधिक अच्छा जीता हूं एवं अधिक प्रसन्न हूं।’’
‘‘डाॅक्टरों ने तो कह दिया था कि मैं 25 वर्ष से अधिक नहीं जी सकूंगा। जब बीमारी का पता चला तब में 21 वर्ष का था, उसके अनुसार मैं 4 वर्ष और जी सकता था। लेकिन आज 30 वर्ष हो गये, मैं अपना कार्य कर रहा हूं। शायद यह मेरे आत्मविश्वास का ही चमत्कार है।’’ तभी तो साक्षात्कार का शीर्षक था ‘‘प्रभु के हाथ में डोर नहीं’’। फिर डोर किसके हाथ में है ? मेरी डोर मेरे हाथ में है। यह है आत्मविश्वास।
मित्रों, देखा! जब हाॅकिंग अपनी बीमारी के उपरान्त इतना कार्य कर सकता है तो आप और हम क्यों नहीं कर सकते ?   क्या आपकी समस्या हाॅकिंग से बड़ी है ? कम से कम आपकी बाॅयोलोजी, आपका शरीर तो आपका साथ दे रहा है। उनकी बाॅयोलोजी को उन्होंने वश में किया है – आत्मविश्वास के सहारे।
मैं अपने मित्रों व परिवार के सदस्यों से अक्सर परेशानी प्रकट करने पर पूछता हूं कि, ‘‘क्या आपकी समस्या हाॅकिंग की समस्या से बड़ी है ?’’
अगर हाॅकिंग से हमें आत्मशक्ति बढ़ाने की प्रेरणा नहीं मिलती है तो यह प्रेरणा कहां से मिलेगी ? मैं मानता हूं समस्याएं निश्चित रूप से हैं। लेकिन हाॅकिंग की समस्याओं से बड़ी तो नहीं हैं ? इस वाक्य को कि, ‘‘क्या आपकी समस्या हाॅकिंग से बड़ी है ?’’, हाॅकिंग को अपना एंकर (लंगर) बनायें। जब-जब भी आपका जहाज समस्याओं के तूफान में डगमगाने लगे, मन निराशा के भंवर में फंसा हो तब आपका लंगर डालिये, ‘‘क्या आपकी समस्या हाॅकिंग की समस्या से बड़ी है ?’’ इससे आपमें आत्मविश्वास जागेगा एवं आप निराशा के भंवर से उबर जायेंगे।

15 विचार “मैंरे आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत :डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग&rdquo पर;

  1. जयन्तिजी
    हिन्दी चिट्ठा(blog)जगत में आपने अपनी पहली ही पोस्ट इतनी सुन्दर लिखी है। कई बार हमारा भी आत्मविश्‍वास डगमगाता है। लेकिन अब कोशिश करेंगे कि अगली बार जब भी यह स्थिती आये, सर स्टीफन हॉकिंग के आत्मविश्वास को ध्यान में रख कर उस स्थिती से उबरने का प्रयास करें।
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद, और स्वागत।

    ॥दस्तक॥|
    गीतों की महफिल|
    तकनीकी दस्तक

  2. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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