उठो! जागो!

लक्ष्य की प्राप्ति तक रूको नहीं! -जयन्ती जैन


टिप्पणी करे

स्वास्थ्य सेतु क्या है ?

स्वास्थ्यसेतु एक स्वास्थ्य विमर्श केंद्र  है.  यह एफ-४०,सेक्टर १४, उदयपुर ३१३००२ पर चलता है.यहाँ प्रतिदिन सुबह ६ बजे योग होता है.साथ ही प्रति  शुक्रवार को सायं ५.३० बजे स्वास्थ्य वार्ता होती है या फिर स्वास्थ्य सम्बन्धि डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाती है.

मेरा स्वास्थ्य मेरी जीवन शैली का परिणाम है.

बीमार नहीं बीमारी का इलाज होना चाहिए.

एक पद्धति के पास एक रोग का  इलाज  नहीं है इसका अर्थ यह नहीं  है की अन्य पद्धति के पास भी  उसका इलाज नहीं है.

शरीर ने जैसे ही चालीस पार किए बीमार होना शुरू किया तो समझ में आया की जीवन शैली ठीक नहीं चल रही है.इलाज हेतु दवाई लेनी शुरू की तो पार्श्व प्रभाव नजर आने लगे . एलोपैथि के अलावा  कभी आयुर्वेद,योग,एक्यूप्रेशर,होमियोपैथी अपनाई तो  कुछ  क्षेत्र में अधिक सार्थक लगी.इस हेतु योग करते करते कराने लगे .अनुभव में आया की हम  मात्र दिखाई देने वाला शरीर ही नहीं है हमारी अन्य सुक्ष्म परते भी है.इन को ध्यान में रखने पर योग की गहराईया स्पष्ट हुई .इस तरह परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों में रूचि हुई .

कई देसी पद्धतियां परस्पर   सहायक भी है.कई बार एक पद्धति की कमी दूसरी पद्धति से पूरी भी होती है. गावं का हड्डी जोड़ने वाला  जडीबुटी भी साथ में देता है.इस हेतु विमर्श करने की जगह है बस स्वास्थ्य सेतु .

देसी चिकित्सा के नाम पर नीमहकीम भी शोषण करते है क्योंकि हमें उनका ज्ञान नहीं होता है अत: देसी इलाज कर्ताओ की एप एवम् वेबसाइट बनाई जा रही है.

 

Related Posts:

Desi Ilaj Directory and Android App: Need your Help

उच्च रक्तचाप भगाए, नाड़ी शोधन व भ्रामरी प्राणायाम करे

स्वास्थ्य रक्षक भोजन

हमारी जीवन शैली रोगों की जनक हैं –स्वास्थ्य-सेतु

 


टिप्पणी करे

क्षमा प्रार्थी हूँ!

 

मान्यवर,

हमारे अपने कुछ कृत्य बताते है कि मैंने आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया।kshama-yachna आपकी उपेक्षा, अनसुनी, मनमाफिक अर्थ निकालने, उपयोग-दुरुपयोग कुछ न कुछ वह किया है जो करने योग्य नहीं था। करके माफी चाहना भी अच्छी बात तो नहीं है, लेकिन दूसरा कोई विकल्प इससे बेहतर नहीं सुझ रहा है। इस भार को कम करने हेतु स्वयं भी माफ करने का भाव रखता हूँ व आपसे यही अपेक्षा है। वैसे भाव का प्रस्फुटन मिलने / चर्चा करने पर उत्तम रहता है। लेकिन मजबूरी है सभी से व्यक्तिगत बात नहीं हो सकती है। अतः पाती को ही भाव समझे।
जयन्ती जैन
मीना जैन
स्वास्थ्य सेतुए ( holistic health forum)उदयपुर

रिलेटेड पोस्ट्स:

कब तक गलतियों व क्षमा का क्रम चलेगा ?

तनावमुक्ति का, सफल होने का उपाय : क्षमा करना

नाराजगी कैसे आत्म-विनाशक है ?

दिल के रोग – काॅलस्ट्रोल से कम, घृणा व इर्ष्या से अधिक होते


टिप्पणी करे

रोग दूर करने शरीर की आन्तरिक फार्मेसी को जगाएँ

चारों ओर, यहाँ तक कि हमारे शरीर को देखने पर भी, हमें जो नजर आता है, वह आइसबर्ग का सि़र्फ ऊपरी हिस्सा है। -डाॅ. जाॅन हेजलिन
शरीर का कोई रोग उसके उभार एवं लक्षण तक सीमित नहीं होता है। वह सम्पूर्ण शरीर तन्त्र से सापेक्षित रूप से जुडा होता है। अच्छा चिकित्सा विज्ञान रोग का नहीं रोगी का उपचार करता है।
मानव-देह में कई तरह के रसायन बनाने की क्षमता है। सबसे अधिक तरह की दवाएँ बनाने वाला कारखाना धरती पर कही अन्यत्र नहीं, बल्कि हमारी देह में ही है। यहाॅ सभी प्रकार की दवाएँ समय-समय पर आवश्यकतानुसार बनायी जाती है। हमारी ग्रन्थिया के स्त्रावों से सभी आवश्यक रसायन देह में बनते हंै। दुनिया के अत्यन्त धीमें जहर भी यह देह असन्तुलन की दशा में बनाती है। हमें थकाने वाले, सताने वाले रसायन भी यह देह विकृत अवस्था में या दुरूपयोग करने पर बनाती है। देह दर्द को रोकने वाला पेनकिलर बनाती है तो दर्द पैदा करने वाला रसायन भी इसी देह में बनता है।
इस देह में सभी तरह की दवाएँ पैदा करने की क्षमता है। हम अपनी नकारात्मक सोच, असंतुलन, संदेह, विक्षोभ द्वारा हानिकारक रसायन भी पैदा कर सकते हैं तो सकारात्मक चिन्तन,समता,आस्था को उत्पन्न कर लाभप्रद दवाएँ भी पैदा कर सकते हैं।
जब हमारी प्रतिरोध शक्ति कमजोर पड़ जाती है तब देह बीमार पड़ती है। आन्तरिक असंतुलन से व्यक्ति का स्वास्थ्य नरम पड़ता है। प्राण शक्ति की कमी से मनुष्य बीमार होता है।
मानव देह ऊर्जा और प्रज्ञा का एक नेटवर्क है, न कि केवल हड्डियों का ढांचा। अर्थात हमारी देह की छोटी से छोटी ईकाइ क्वान्टम है जो कि ऊर्जा का एक कण है। इस कण में विकास व वृद्धि स्वचालित है। इस विकास व वृद्धि की सूचना ही प्रज्ञा का नेटवर्क है। रोग शरीर को अक्षुण्ण रखने वाली क्वान्टम तरंगों की संरचना में विकृतियों के फलस्वरूप होते हैं।
वातावरण ही हमारा विस्तृत शरीर है। रोगों का कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति स्वयं ही है।
शरीर में रोग के अनुकूल दवा बनाने की क्षमता होती है और यदि उन क्षमताओं को बिना किसी बाह्य दवा और बिना आलम्बन के विकसित कर दिया जाता है तो उपचार अधिक प्रभावशाली,स्थायी एवं भविष्य में पड़ने वाले दुष्प्रभावों से रहित होता है।

Related  posts:

 

देसी इलाज का अज्ञान ,अंग्रेजी इलाज की जीत :देसी इलाज करनेवालो की डायरेक्टरी


टिप्पणी करे

जीवन का अर्थ किसे कहाँ मिला

 
नाम                                               जहाँ जीवन का अर्थ मिला

कृष्ण-                                                निष्कामता में
महावीर-                                             स्वयं की खोज में
बुद्ध-                                                  दुःख का कारण
वेद व्यास –                                           समाज सेवा में
ओशो-                                                होश में जीने में

मीरा-                                                भक्ति में
गांधी-                                                देश की आजादी में
निराला-                                             स्वाभिमान में
रॉक फैलर-                                          रोगों के उपचार खोजने में धन लगाने में
अल्बर्ट श्वाइट्जर-                                  इलाज करने में
एनड्रयू कारनेगी-                                   गरीबों की मदद करने में
स्टीफन हॉकिग-                                 ब्रह्याण्ड का रहस्य जानने में
जे कृष्णमूर्ति-                                     प्रेम और ध्यान में
एडीसन-                                            नए वैज्ञानिक गजट बनाना
विन्सेन्ट गोग-                                         चित्र बनाना
आचार्य चतुरसेन-                                    लिखना
मदर टेरसा-                                            रोगी व अनाथ बच्चों की सेवा में
विवेकानन्द-                                       संस्कृति का प्रसार करने में
सुभाष बोस-                                        राजनैतिक आजादी में
ए. पी. जे. कलाम-                             राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करने में
फ्लोरेन्स नाइटेगले-                             रोगियों की सेवा में
राजा राममोहन राय-                            सामाजिक सुधार में

 

आपके जीवन का उद्देस्य क्या हे?


2 टिप्पणियाँ

देसी इलाज का अज्ञान ,अंग्रेजी इलाज की जीत :देसी इलाज करनेवालो की डायरेक्टरी

सिर्फ एलोपेथी ही चिकित्सा प्रणाली नहीँ हैं,अन्यत्र विकल्प भी हैं जिनका दुष्प्रभाव भी कम होता हैं. एवं जड़ से बीमारी ठीक भी होती हैं.लेकिन उनका हमें ज्ञान एवं पता नहीं होता न ही उनकी विश्वनीयता का ज्ञान होता हैं .अतः हम (स्वास्थ्य सेतु) देसी इलाज करने वालो की एक डायरेक्टरी बना रहे हैं जो हमारी वेबसाइट पर व ऐप में उपलब्ध होगी . हमारा उद्देश्य इन चिकित्सा पद्धतियों का पता उपलब्ध करा कर इनको बचाना एवं सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देना हैं.उनकी रेटिंग्स भी उसमे होंगी .
हम अपने स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं लेकिन इतने बड़े देश में सिमित साधनो के होने से हमारी सीमा हैं अतः आपसे सहयोग चाहिए .आप निचे दिए गए फॉर्म मेँ देसी इलाज करने वालो की सुचना भरे .ऐप में सूचना देनेवाले का नाम भी होगा .
> Fill Form Here

सहयोग देने के लिए दिल से आभार .
आपका अपना
जयंती जैन ,
संस्थापक :स्वास्थ्य-सेतु
(होलिस्टिक हीलिंग फोरम )

9414289437

Related  Posts:

Desi Ilaj Directory and Android App: Need your Help

आहार चिकित्सा द्वारा कैंसर का इलाज : बुडविज का आहार-विहार

रिफाइंड तेल से कैंसर हो सकता है?

रिफाइंड तेल से कैंसर हो सकता है?

 

 

 

 


1 टिप्पणी

Desi Ilaj Directory and Android App: Need your Help

Dear Sir/Madam,

We are building a directory of Desi Ilaj practitioners, this information would be available on Website and Android App. Our aim is to make information about desi ilaj, vaidhys,  Ayurveda acharya, bone setters, homeopathy, yoga instructors etc to everyone. In today’s world allopathy is not the only solution to diseases, there are many other solutions which have no side effects and can treat illnesses in the long run.

There is no proper information about alternate practitioners to allopathy. Even if there is information, it is very hard to find out a person is genuine or taking advantage of your illness. Our aim is to make a directory and rate the practitioners with your help. We have already compiled a list, but India is such a vast country that a lot of support is needed in completing the directory. You can provide the details of such practitioners, and we would add it to our App and display your name as well (for providing information). Please provide details by filling the form below:

> Fill Form Here

Thank you for your collaboration from Swasthya Setu.

Jayanti
Founder,
Swasthya Setu (Holistic Healing Forum)
9414289437

 

 


टिप्पणी करे

कैंसररोधी बुडविज आहार के अत्यंत महत्वपूर्ण बिन्दु

ये सब इस आहार विहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है-

1. डाॅ. योहना कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, वनस्पति घी, ट्रांस फेट, मक्खन, घी, चीनी, मिश्री, गुड़, रिफाइन्ड तेल, सोयाबीन व सोयाबीन से निर्मित दूध व टाॅफू आदि, प्रिजर्वेटिव, कीटनाशक, रसायन, सिथेंटिक कपड़ों, मच्छर मारने के स्प्रे, बाजार में उपलब्ध खुले व पेकेट बंद खाद्य पदार्थ, अंडा, मांस, मछली, मुर्गा आदि से पूर्ण परहेज करने की सलाह देती थी।
2. वे कैंसर रोगी को सनस्क्रीन लोशन, धूप के चश्में आदि का प्रयोग करने के लिए भी मना करती थी। रोज सूर्य के प्रकाश का सेवन अनिवार्य है। इससे विटामिन-डी भी प्राप्त होता है। रोजाना दस-दस मिनट के लिए दो बार कपड़े उतार कर धूप में लेटना आवश्यक है। पांच मिनट सीधा लेटे और करवट बदलकर पांच मिनट उल्टे लेट जायें ताकि शरीर के हर हिस्से को सूर्य के प्रकाश का लाभ मिले।
3. रोगी को रोजाना अलसी के तेल की मालिश की भी जानी चाहिए इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
4. रोगी को हर तरह के प्रदूषण (जैसे मच्छर मारने के स्प्रे आदि) और इलेक्ट्रानिक उपकरणों (जैसे ब्त्ज् वाले टी. वी. आदि) से निकलने वाले विकिरण से जहां तक सम्भव हो बचना चाहिए।
5. रोगी को सिन्थेटिक कपड़ो की जगह ऊनी, लिनन और सूती कपड़े प्रयोग करना चाहिए।
6. गद्दे भी फोम और पोलिस्टर फारबर की जगह रुई से बने है।

7. अलसी को जब आवश्यकता हो तभी पीसें। पीसकर रखने से ये खराब हो जाती है।
8. अलसी का तेल को तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पर यह खराब हो जाता है।इसलिए प्रकाश व आॅक्सीजन से बचायें। आप इसे गहरे रंग के पात्र में भरकर डीप फ्रीज में रखें।
9. दिन में कम से कम तीन बार हरी या हर्बल चाय लें।
10. प्राणायाम, ध्यान व जितना संभव हो हल्का फुल्का व्यायाम या योगा करना है।
11. घर का वातावरण तनाव मुक्त, खुशनुमा, प्रेममय, आध्यात्मिक व सकारात्मक रहना चाहिये। आप मधुर संगीतें सुनें, खूब हंसें, खेलें कूदें। क्रोध न करें।
12. सप्ताह में दो-तीन बार वाष्प-स्नान या सोना-बाध लेना चाहिए।
13. पानी स्वच्छ व फिल्टर किया हुआ पियें।
14. अपने दांतो की पूरी देखभाल रखना है। दांतो को इंफेक्शन से बचाना चाहिए।
इस उपचार से धीरे-धीरे लाभ मिलता है और यदि उपचार ठीक प्रकार से लिया जाये तो सामान्यतः एक वर्ष या कम समय में कैंसर पूर्णरूप से ठीक हो जाता है। रोग ठीक होने के पश्चात् भी इस उपचार को 2-3 वर्ष या आजीवन लेते रहना चाहिये।
सबसे महतवपूर्ण बात यह है कि इस उपचार को जैसा ऊपर विस्तार से बताया गया है वैसे ही लेना है अन्यथा फायदा नहीं होता है या धीरे-धीरे होता है। अधिक जानकारी हेतु अंतरजाल पर हमारे इस पृष्ठ ीजजचरूध्ध् सिंगपदकपंण्इसवहेचवजण्बवउ पर चटका मारें। अधिक जानकारी के लिए डाॅ. ओ पी वर्मा कोटा से सम्पर्क कर सकते है। उनका मोबाईल नं. 9460816360 है।

Related Posts:

आहार चिकित्सा द्वारा कैंसर का इलाज : बुडविज का आहार-विहार

रिफाइंड तेल से कैंसर हो सकता है?

क्या पोषक आहार के होते हुए पुरक आहार की जरूरत है ?

एम आर लाला की कैंसर विजय कहानी

असाध्य रोगों से लड़ने वालों की सच्ची प्रेरक कहानियाँ: हंसते-हंसते पत्नी के ब्रेन-ट्यूमर का सामना किया