प्राचीन कथानुसार राजा पृथु के समय कुटिल ढुन्ढा नाम की एक राक्षसी थी जो बच्चों को परेशान करती थी,चुराया करती थी,उसके भय से बच्चे बीमार हो जाते थे एवं वह उन्हे खा जाती थी । इस कारण बच्चे उससे बहुत डरते थे।उसे वरदान प्राप्त था लेकिन शिव के शाप के कारण बच्चो की शरारत से [...]
Posts Tagged ‘Value of life’
28 जुला
अपने भीतर देखो, उसे संभालों सफलता निश्चित है
हमारे जीवन में अंतर्यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे सारे कार्यो के लिए अंदर की सोच व भाव ही जिम्मेदारहै। अण्डा अगर बाहर से फूटे तो जीवन समाप्त होता है। यदि अण्डा भीतर से फूटे जो जीवन प्रारम्भ होता है।अर्थात् जीवन में अन्तर्यात्रा जरूरी है। हमारे जीवन का सारा व्यवहार भीतर से तय होता है। हम [...]
7 जून
सफलता पाने हेतु भोजन से प्राणऊर्जा कैसे प्राप्त करें?
यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हम जन्म से भोजन करते है लेकिन यह नहीं जानते है कि कब खाना, कितना खाना और क्या खाना है। एक बार अरस्तु से उसके शिष्य ने पूछा, ‘‘सफलता का रहस्य क्या है ?’’ अरस्तु ने जवाब दिया, ‘‘सफलता का रहस्य मुँह में है।’’ शिष्य ने फिर पूछा, [...]
24 दिस
पल-पल सजगता से जीओं ताकि पूरा जीवन आन्नदमय हो जाय!
जीवन जीने की कला आनन्दपूर्ण ढंग से जीना ही है। आनन्द हमसे बाहर नहीं है। इसे प्राप्त करना होता है। यह स्वतः नहीं उपजता है। आनन्द स्थिर (स्टेटिक) नहीं होता है, यह निरन्तर गतिमान है। आनन्द कोई ऐसी चीज नहीं है कि एकदम व्यक्ति अचानक पा जाय और एक जगह पहुँच जाए जहाँ आनन्द का [...]
7 मई
बाॅडी लैंग्वेज पर एलन पीज की विश्व प्रसिद्ध कृति
पुस्तक समीक्षा हाव-भाव से कैसे समझें दूसरों के मन की बातें ‘‘बाॅडी लैंग्वेज’’ एलन पीज की देह भाषा पर मौलिक रचना है। देह भाषा पर यह सबसे चर्चित कृति है। शब्दों से अधिक हम शारीरिक हाव भाव एवं मुद्राओं के द्वारा कहते है, जिसे अशाब्दिक संप्रेषण कहते है। शाब्दिक संप्रेषण की बहुत सीमा है।शब्दों से [...]
12 मार्च
सफलता प्राप्ति हेतु प्राथमिकताओं को कैसे तय करना?
समय-प्रबन्धन ही ‘जीवन-प्रबन्धन’ है। आज का आदमी भाग रहा है। सदैव जल्दबाजी में है, उसके पास रुककर विचार करने का समय नहीं है। यदि वह भागता रहा तो प्राथमिकताओं का निर्धारण नहीं कर सकता है। लक्ष्य के अभाव में जीवन व्यर्थ है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। यदि [...]
9 अक्टू
सकारात्मकता क्या है एवं SWOT विश्लेषण कैसे करे ?
इस पर मुझे एक कहानी याद आती है। किसी दूधवाले की दूध की केन में एक नटखट बालक ने दुखीराम नामक मेढ़क को पकड़ कर डाल दिया। केन में बन्द होते ही मेढ़क घबरा गया। केन का ढक्कन बन्द था व उसके बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। नाम से ही नहीं वह सोच [...]
4 अग
मानव देह का मूल्य
मैंने सुना है कि स्वामी विवेकानन्द एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे। एक भिखारी ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए उनसे भीख मांगी। पहले स्वामीजी मौन हो गये। फिर दूसरी बार भिखारी ने कहा, ‘‘श्रीमान्, मैं बहुत गरीब हूं, मेरे पास कुछ भी नहीं है, मुझ पर दया करो।’’ दुबारा भीख मांगने [...]

