Posts Tagged ‘समय प्रबन्धन’

आगे बढ़ना है तो नकारात्मकता, निन्दा में समय नहीं खोए

जीवन में 20 प्रतिशत समय अगर पछताने, बुराई करने, झगड़ने व रोने में खोते है तोे 20 वर्ष इसमें निकल जाते है। मेरी 55 वर्ष की आयु होने से 11 वर्ष मैं इसमें खो चुका हूँ। अब एक मिनट भी नकारात्मकता में नहीं खोना चाहता हूँ। अतः अब शिकायतें करने में समय नहीं गँवाना है। [...]

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सफलता हेतु प्राथमिकताओं को कैसे तय करना?

हमारी   प्राथमिकताएँ तय नहीं है।कम महत्वपूर्ण कार्य शीघ्र व पहले करते है।  इसका चयन  नहीं करते है। लक्ष्य के अभाव में जीवन व्यर्थ है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। यदि आप अपनी कार्यो की प्रायोरीटि तय नहीं करते है तो कार्य आपको घूमाते रहते है। सदैव व्यस्त [...]

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सफलता प्राप्ति हेतु प्राथमिकताओं को कैसे तय करना?

समय-प्रबन्धन ही ‘जीवन-प्रबन्धन’ है। आज का आदमी भाग रहा है। सदैव जल्दबाजी में है, उसके पास रुककर विचार करने का समय नहीं है। यदि वह भागता रहा तो प्राथमिकताओं का निर्धारण नहीं कर सकता है। लक्ष्य के अभाव में जीवन व्यर्थ है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। यदि [...]

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आत्मछवि बदले और अपने भाग्य विधाता बने

मेरे मित्र राज बापना ने उठो जागो देखकर पुछा कि 250 पेज की क्र्रति का सार एक वाक्य में बताओ ?तब में सोच में पड गया और थोडी देर बाद बताया कि मैने इस पुस्तक मे आत्म छवि  बढाने के बारे में लिखा है । सफलता प्राप्ति का जनक आत्मछवि है ।हम अपने मन में [...]

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सफलता का व्यावहारिक मन्त्र -सकारात्मक सोच

सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। यह सर्व कल्याणकारी मंत्र है। मेरी शान्ति, सन्तुष्टि, तृप्ति और प्रगति का अगर कोई प्रथम पहलू है, तो वह सकारात्मक [...]

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सकारात्मकता क्या है एवं SWOT विश्लेषण कैसे करे ?

इस पर मुझे एक कहानी याद आती है। किसी दूधवाले की दूध की केन में एक नटखट बालक ने दुखीराम नामक मेढ़क को पकड़ कर डाल दिया। केन में बन्द होते ही मेढ़क घबरा गया। केन का ढक्कन बन्द था व उसके बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। नाम से ही नहीं वह सोच [...]

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नमस्ते कैसे पहुँचाए ?

नमस्ते करना परिचय का प्रतीक है। हम दिन में कइ्र्र बार नमस्ते करते हैं। लेकिन यह सदैव उन तक पहुँचता नहीं है। हमारा घ्येय सामने वाले तक नमस्ते पहुँचाना होता है, लेकिन कई बार वह  गन्तव्य तक नही पहुँचता। जब जीवन पूरा व्यस्तताओं से भरा हो, किसी को फुरसत न हो ,तब भी नमस्ते ऐसे [...]

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अवचेतन मस्तिष्क के अज्ञान से कैसे हुई हानि ?

जब मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, मुझे अवचेतन की शक्ति का ज्ञान नहीं था और इसका उपयोग कैसे किया जाए यह भी पता नहीं था । अनजाने ही, मैं अवचेतन मन की शक्ति का शिकार हो गया। एक लड़की मेरी मित्र थी।  सोने से पूर्व मैं उसे याद करता था, कई बार [...]

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कैसे अवचेतन मस्तिष्क ने मुझे सहयोग किया ?

मैंने अपने अवचेतन मन का उपयोग अनजाने में ही सन् 1978 में किया । जब मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ता था।  मेरी बचपन में मँगनी हो गई थी। मेरा परिवार शादी करने हेतु मुझ पर दबाव डाल रहा था।  मेरी माँ को उच्च रक्तचाप था।  पिताजी सामाजिक दबावों से व्यथित थे।  इन्हीं कारणों से, [...]

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चिट्ठे पर ट्राफिक कैसे बढाएं: USP की मदद से

मैंने जीवन प्रबन्धन पर अपनी आगामी पुस्तक “स्वयं के साथ कैसे रहे” की योजना प्रकाषक मेसर्स मेकमिलन इण्डिया लि. नई दिल्ली को भेजी थी। उन्होने लिखा कि आप अपनी किताब की USP भेजे। तब मुझे समझ मे आया कि वही बात ब्लाग पर भी लागू होती है। आपके ब्लाग की यूनिक सेलिग  प्रपोजिशन/पोइन्ट (USP) क्या [...]

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