1. अपने को तनावग्रस्त मत करो। अपने को इतना गम्भीर मत बनाओ। परेशान होने की जरूरत नहीं हैं,हिमालय गिरने वाला नहीं है ।
2. अपने कार्य को पसंद करो। तब यह भार नहीं आनन्द होगा। तब शायद तुम्हें अपना व्यवसाय नहीं बदलना पड़े। स्वयं को बदलो,दृष्टी बदलेगी तबव्यवसाय बदला हुआ नजर आयेगा।
3. कार्य की योजना बनाओ। योजना पर कार्य करो ’ मैं थक-हार गया हॅू ’ की सोच बताती है कि आप के कार्य करने की शैली ठीक नहीं है, उसमें सुधार की जरूरत है।
4. बहुत से कार्यो को एक समय में एक साथ मत करो, इससे तनाव होता है। ऐसे में तत्क्षण निणर्य करो कि ’’ यह एक काम मैं अभी करता हॅू’’
5. कार्य के प्रति सकारात्मक नजरिया रखें। कार्य को खराब और अच्छा हमारी सोच बनाती है। कार्य के विरूद्ध सोचे तो कार्य कठिन हो जाता है। कार्य को सहज माने तो वह सरल हो जाता है।
6. अपने कार्य में प्रवीण बनो। अपने व्यवसाय के बारे में ज्ञान बढ़ाओ। ज्ञान ही शक्ति है। तब कार्य को सही करना आसान होता है।
7. रिलेक्स रहने का अम्भास करें। कार्य से जी न चुरायें न उसे टाले। निर्णय लेकर अपनी तरह से चरण बद्ध तरीके से कार्य करते जाये।
8. जिस कार्य को आज किया जा सकता है उसे कल के लिये नहीं टालें। बचे हुए कार्य आपके कार्य एवं लक्ष्य को
कठिन बनाते हैं। प्राथमिकता अनुसार उन्हंे निपटाते चलें।
9. कार्य हेतु प्रार्थना करो। कार्य पूरा होने पर शान्ति व शुकून का अनुभव करें।
10. अपने कार्य में ’ अदृश्य भागीदार’ यानि परमात्मा पर यकीन करंे। वह आपके सकारात्मक बोझ को आश्चर्यजनक ढं़ग से कम कर देगा। परमात्मा जैसा वह मन्दिर में है, वैसा ही घर, दुकान कार्यालय, फैक्ट्री व रसाईघर में भी है । वह आपके कार्य के बारे में आपसे ज्यादा जानता है। उसकी सहायता आपके कार्य को सहज बनाती है।
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