लक्ष्य समान हो, सपने हो, शौक सम्मान हो तो जीवन साथी के साथ जीने में सुविधा होती है। क्योंकि उनके समान होने से परस्पर समझ बढ़ जाती है। जिससे समायोजन में सुविधा रहती है।
‘सम्पूर्ण जीवन’ साथी एक कल्पना है। यह जीवन में नहीं मिलता है। हम सब अधुरे है। कमियां हम सब में है। अतः पूर्णता की ईच्छा अपने साथी से न करें। साथी ऐसा चुने जिसके साथ आप सुख पूर्वक रह सके, खुल कर हँस सके बिना बोर हुवे समय बिता सके। कभी-कभी थोड़ा लड़ सके, नाराज हो सके ताकि रेचन होता रहे व ताजगी बनी रहें। खट्टा-मीठा स्वाद दाम्पत्य जीवन मे अच्छा रहता है।ज्योतिष?कुछ लोग ज्योतिष के आधार पर पाटर्नर की कुन्डली मिलवाते है। वैसे कुण्डली की प्रकृति, स्वभाव व गुणों का अवलोकन प्राचीन है कि दोनों में तालमेल कितना संभव है।यह एक अनुमान विज्ञान से अधिक कुछ नहीं है। इसकी बजाय सेहत कुन्डली व गुण कुन्डली मिलान करना बेहतर है।
वर-वधु का चयन करते वक्त परिजन तो सामाजिक, वंशानुगत व अन्य पक्ष देखे ही लेकिन संभावित उम्मीदवारों की व्यक्तिगत मूलाकातें जरूर कराएं। इनसे ही परस्पर रूचि व लक्ष्यों की समझ हो सकती है। शुरू में दोनों को ठीक लगें तो अंतरंग वार्ताएं करने के ओर अवसर दे। इनमें ही व्यक्तिगत स्वभाव एवं सामाजिक सोच, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से एक दूसरें को समझने का अवसर मिलता है।शादी भावी वर-वधु को करनी है। उन्हें साथ रहना है। अतः यह निर्णय उन्हें करने दे कि वे सहमत है या नहीं। माता-पिता इस सम्बन्ध में उन्हें सूचनाएं उपलब्ध कराएं, वर-वधु के विश्लेषण में मदद करें लेकिन अन्तिम निर्णय उन्हीं को करने दें।
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