मेरे प्रभु, तेरे चरणों में पहुँचे मेरी यह प्रार्थना दूर कर दो, प्रभु, मेरे ह्नदय की क्षुद्रता, दो मुझे शक्ति सहज भाव से अपने आनंद और विषाद सहने की। दो मुझे शक्ति जिससे मेरा अनुराग तेरी सेवा में सुफल हो। प्रभु, ऐसी शक्ति दो मुझे कि दीनजन से किसी विमुख न होऊँ मैं ऐसी शक्ति [...]
Archive for the ‘Meditation’ Category
3 मई
तन्त्र पर फिलिप राॅसन की प्रसिद्ध पुस्तक-’’द आर्ट आॅफ तन्त्र’’
’’द आर्ट आॅफ तन्त्र’’ की विषयवस्तु तन्त्र के द्वारा जीवन-ऊर्जा के रूपान्तरण से संबंधित है । इसमें बताया गया है कि तन्त्र अध्यात्म से कैसे जुडा हुआ है ? तन्त्र के द्वारा जीवन ऊर्जा का रूपान्तरण हो सकता है, यह अच्छी तरह समझाया हुआ है । तन्त्र यौन-ऊर्जा को ब्रह्माण्डीय एवं रचनात्मक ऊर्जा मानता है [...]
25 अप्रै
स्वस्थ रहने हेतु लुइस हे की प्रार्थना
स्वस्थ रहने हेतु लुइस हे की निम्न प्रार्थना को रोज मन से करे फिर चमत्कारिक परिणाम पाए। इस जीवन की अनंतता में, जहाँ में हूँ, सब संपूर्ण और परिपूर्ण है। फिर भी जीवन सदैव बदलता रहता है। यहाँ न कोई आरंभ है [...]
7 अप्रै
महावीर जयन्ती की हमारे जीवन में प्रासंगिकता
आज महावीर जयन्ती है । हम सबको उनकी जीवन में उपयोगिता पर विचार करने की जरूरत है । महावीर जयन्ती तो हम 30-40-50 वर्षों से मनाते आए है । प्रभात फेरी, स्वामी वत्सल, संतों के दर्शन, पूजन-पाठ करते आ रहे है । लेकिन हम वहीं के वही है, वैसे ही है जैसे थे । फिर [...]
21 फ़र
सहज समाधि ध्यान करना चाहिए या नहीं?
तनावभरी जिन्दगी में शांति पाने सहज ध्यान करें। अपनी अशान्ति, बैचेनी, आकुलता, जल्दबाजी से मुक्त होकर जीवन का रस भोगने सहज ध्यान करें। इससे हमें राहत मिलती है। यह अन्धकार से प्रकाश में जाने का पथ है। इससे जीवन में सन्तोष आता है, स्वीकार भाव आता है, आनन्द आता है। श्री श्री रविशंकर, आर्ट आॅफ [...]
11 नव
जब कठिन आसन व प्राणायाम न कर सको तो सूक्ष्म व्यायाम करें
जीवन में सूक्ष्म व्यायाम का बड़ा महत्व है। इसके सूक्ष्म नामकरण से इन्हें छोटा न समझें। सूक्ष्म व्यायाम करने में योग व प्राणायाम स्वतः ही हो जाते है। यह योग व प्राणायाम का राजा है। इनकी जीवन में बड़ी भूमिका है। वैसे योगासन व प्राणायाम के लिए पूर्व तैयारी में इनको करते है। सूक्ष्म व्यायाम [...]
4 अक्टू
इस हाथ को कौन हिलाता है? हम कर्ता है या दृष्टा है।
जब हाथ हिलता है तो हम हिलाने वाले है या दृष्टा है? मेरा हाथ हिलता है तो मैं कहता हूँ कि मैं इसे हिलाता हूँ। जब लकवा हो जाए और हाथ न हिले तो मैं कहता हूँ कि लकवा हो गया। अरे! जब हिलता है तब मैं हिलाता हूँ एवं जब नहीं हिलता है तो [...]
13 सित
चेतना की यात्रा से संज्ञान हुआः गड़बड़ है मन में अपराधी हूँ अपना व आपका-मिच्छामि दुक्कड़म
विगत दस दिनों से मौन था। चेतना की यात्रा के प्रयासरत था। स्वयं के होने का अन्वेशषण कर रहा था। अपने निर्माता से मिलने की जुगाड़ में था। यानि जीवन का रहस्य अनावृत करने का प्रयत्न कर रहा था। साम्प्रादायिक जैन की तरह कर्मकाण्ड छोड़ अपनी खोज पर था। अपनी असलियत,मन की भागमभाग, वासनाओं की [...]
28 जुला
अपने भीतर देखो, उसे संभालों सफलता निश्चित है
हमारे जीवन में अंतर्यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे सारे कार्यो के लिए अंदर की सोच व भाव ही जिम्मेदारहै। अण्डा अगर बाहर से फूटे तो जीवन समाप्त होता है। यदि अण्डा भीतर से फूटे जो जीवन प्रारम्भ होता है।अर्थात् जीवन में अन्तर्यात्रा जरूरी है। हमारे जीवन का सारा व्यवहार भीतर से तय होता है। हम [...]
11 जून
सफलता पाने हेतु विश्राम से प्राणऊर्जा कैसे बढ़ाएं?
प्राणऊर्जा प्राप्त करने का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत विश्राम है। हम विश्राम के द्वारा ही स्वयं को संतुलित एवं समायोजित करते है। हम खोई हुई ऊर्जा की प्राप्ति विश्राम से ही करते है। कार्य के दौरान् विश्राम जरुरी है। विश्राम के दौरान् हम अपनी ऊर्जा को संरक्षित व सुरक्षित करते है। तभी तो योगासन के बाद [...]

