Archive for the ‘Book Review’ Category
4
अप्रै
Posted by jayantijain in Art of Living, Articles, Book Review, Personality, Self-Healing, Spirituality, Stress Management, Uncategorized. Tagged: अलसी, अवचेतन मन, कृतज्ञता, कैंसर, निर्णय, प्रबल इच्छा, मन, मनोवृती, मस्तिष्क, लुईस हे, सेहत. 1 टिप्पणी
एलोपैथी के अतिरिक्त भी कैंसर का इलाज कई तरीकों से होता है । इसका उद्देश्य कैन्सर रोगियों को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से अवगत कराना है । इसने एलोपैथी के साथ-साथ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का अध्ययन कर बताया है कि बुडविझ प्रोटोकोल इनमे से श्रेष्ठतम है । यह कैंसर रोगियों एवं उनके सम्बन्धियों के लिए एक विश्व कोष है जिसको पढ़ कर उपचार कराने का सही निर्णय ले सकते हैं । लोथर हरनाइसे ने दुनिया भर में कई वर्षों तक शोध कर इसे लिखा है ।
इसके अनुसार रोगी को 3 म् का पालन करना चाहिए ।
पहला म् (इट हेल्दीवेल) स्वस्थ आहार से है । इसमे रोगी को ठण्डी विधि से तैयार अलसी का तेल व पनीर का मिक्सर विभिन्न सुखे मेवे व फलों के साथ दिया जाता है ।
बुडविझ के आहार के साथ-साथ दूसरा म् (एलीमीनेट टाॅक्सीन्स) शरीर के विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालना है । इसमे एनिमा लगा कर शरीर को निर्विष बनाया जाता है । इसमे पहले शुद्ध पानी का एनिमा लगाया जाता है । इसके बाद काफी एनिमा व एल्डी तेल एनिमा प्रमुख है ।
तृतीय म् (ईनर्जी) ऊर्जा के जागरण से है । जीवन का लक्ष्य तय कर जीना मुख्य है । दिशा तय कर ही दशा बदली जा सकती है । इसमे आत्मदर्शन द्वारा सकारात्मक होना व स्वस्थ होने के भाव में जीना प्रमुख है ।
लेखक एक जाने माने कैंसर शौध विशेषज्ञ है । जो दुनिया भर में घुम-घुम कर सभी देशों में उपलब्ध कैंसर उपचार सम्बन्धी विधियों का विश्लेषण करते रहे हैं ।
यह पुस्तक मुलतः जर्मन भाषा में लिखी गयी है । इसका अंग्रेजी संस्करण उपलब्ध हैै
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18
मार्च
Posted by jayantijain in Art of Living, Articles, Book Review, Self-Healing, Spirituality, Stress Management, success. Tagged: अलसी, कैंसर, मन, लेखक, शिक्षान्तर, शिखर पर मिलेगे, सेहत. 2s टिप्पणियाँ
डाॅ0 रे डी स्ट्रेंड ने एक पोषक तत्वों के बारे में उपयोगी किताब’’व्हाट योर डाॅक्टर डजन्ट नो अबाउट न्यूट्रिश्नल मेडिसिन मे बी किलींग यू’’ लिखी है जिसका हिन्दी अनुवाद ’’क्या आपका डाॅक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है ?’’ े मंजुल पब्लिसींग हाउस भोपाल से छपी है । 
यह एक सत्य है कि दुनिया भर में डाॅक्टरों को दवाओं के जरिये बीमारियों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है । लेकिन उन्हे हमारे जीवन को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण और शक्तिशाली तरीकों के बारे में कोई ज्ञान नहीं दिया जाता है ।
यह पुस्तक आपको सिखाएगी कि क्यों सरकार द्वारा पोषक तत्वों की अनुशंसित मात्रा हमारे शरीर के प्राकृतिक रक्षातंत्र को बीमारियों के प्रति शक्तिशाली नहीं बना पाती है – और आपको पोषक तत्वों की कितनी मात्रा की आवश्यकता होती है ।
शरीर के अन्दर आॅक्सीजन का विघटन किस प्रकार विनाश उत्पन्न करता है और आप इससे हुई क्षति से कैसे निपट सकते हैं ।आप लगातार होने वाली एलर्जी और सायनस के संक्रमण से किस प्रकार लड़ सकते हैं ।
आपके डाॅक्टर द्वारा गंभीर क्षयकारी बीमारियों से बचाव के लिए दी गई दवाइयाॅं क्यों बेहतर नहीं होती है ।
बड़े दुख की बात है कि जब तक आपको किसी बीमारी का पता चलता है तब तक आप एक स्वस्थ और उत्साहपूर्ण जीवन खो देते हैं ।
रे स्ट्रैंण्ड की क्रांतिकारी पुस्तक
- आपको वर्तमान और भविष्य में अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के सरल उपायों के बारे में बताती है ।
- यह बीमारियों के कारण हुए नुकसान से भी छुटकारा दिलाती है ।
- अपने शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति में बढ़ोतरी करें ।दिल की बीमारियों से बचाव के लिए कोलेस्टेराॅल का स्तर महत्वपूर्ण कुंजी क्यों नहीं है
- कैंसर, डायबिटीज, आर्थराइटिस, अल्जाइमर्स, फाइब्रोमाएल्जिया और अन्य बीमारियों की जड़ के बारे में चिकित्सा प्रमाण वास्तव में क्या बताते हैं
- बुढ़ापे को रोकने की सही रणनीति पर अमल करना अभी शुरू करें और खुद को आॅक्सीजन के हानिकारक प्रभावों से बचाएॅ
3
अक्टू
Posted by jayantijain in Articles, Book Review, Life-Management, Personality. Tagged: अवचेतन मन, पटकथा, प्रबल इच्छा, ब्लॉग लेखन, लेखक, शिक्षान्तर, सफलता. Leave a Comment
उदयपुर इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के क्रम में स्क्रिप्टराईटिंग पर वर्कशाॅप के दूसरें दिन श्री गौरव पंजवानी द्वारा ली गयी । मैने भी इसमे भाग लियज्ञं पंजवानी पहले एड फिल्मे एवं लघु फिल्में बनाते थे । उनकी चर्चित लघू फिल्म फैसपेक नामक है ।
उन्होने प्रारम्भ में बताया कि पटकथा लिखने के कोई नियम नहीं हो सकते है।कभी भी, कहीं भी किसी भी तरहकी स्थिति में लिखि जा सकती है।यह सृजन का कार्य है, इस हेतु लिखनें का मन होना चाहिये । यह नियमो से परे रूचि और सृजन का काम है।
उपन्यास कहानी की जीवनी है ।इसमें विस्तार से बारीक चीजों का वर्णन होता है ।जैसे खिडकी से झांकती लडकी का वर्णन करतें वक्त आकाश मेंबादल, उडती चिडियां, पडोैस में खडा पेड या सडक पर की हलचल की दास्तान भी महत्वपुर्ण है ।अर्थात विस्तार से लिखना चाहिये फिल्मी पटकथा में भी जितना विस्तृत वर्णन होता है,वह उतना ही महत्वपुर्ण है ।
पात्रों को सामान्य से विशिष्ठ बनाय अर्थात लार्जर देन लाईफ। स्टिरियोटाईप पात्रों में कोई विशिष्ठता जोडकर उसमे ंप्राण फुंके ।इसके लिये हमारें पुराण, महाभारत एवं रामायण उपयोगी है ।पात्र एवं धटनाओं को नया रंग देनें की जरूरत है ।
पटकथा के फिल्म निर्माण पर श्रोताओं को उस धटना का एहसास होना चाहिये ।दर्शक हाल भूलकर वहां पहूंच जाना चाहिये ।
पटकथा लिखतें समय विषय या लक्ष्य पर न्याय करना जरूरी है ।पूर ेविषय का खूलासा एवं परिणाम आना चाहिये ।अपनें बीज को पूरा वृक्ष बनाओं ।इसमेंव् यक्तिगत मूल्य बीच में न आनेें दो ।दर्शक का मनोरजंन या स्वयं के सृजन का सूख ध्यानमें रखों। टी.वी. धारावाहिकों की पटकथा लिखनें का अभ्यास इसमें उपादेय है । पटकथा लिखें, पुनर्ःलिखे । जब तक स्वयं सन्तुष्ठ न हो जाये संशोधन करते रहे । यह अभ्यास तकनिकी बारिकीयां सिखा देगा
ं व्यवसायिक सिनेमा के साथ-2 अब कला फिल्मों के भी दर्शक बढे हैं ।
फार्मूला िफल्में ही सिर्फ नहीं चलती है ।सिनेमा में नये प्रयोग करनें के अवसर बढे है ।अतः नई लहर पैदा करें ।
4
जुला
Posted by jayantijain in Articles, Book Review, Meditation, Personality, Self-Healing, Spirituality. Tagged: अवचेतन मस्तिष्क, आत्मछवि, तनावमुक्ति, निर्णय, प्रार्थना, भाग्य, मन, मनोवृती, शिखर पर मिलेगे. 1 टिप्पणी
’’जागो मेरे पार्थ’’ यह अपने नाम के अनुरूप जगाने वाली है । यह महाभारत के अर्जुन को नहीं हमारे मन में चलने वाली महाभारत को जीतने के सम्बन्ध में है । यह हमें जीने की कला बताती है ।
यह पुस्तक धार्मिक कम, सफलता संबंधी अधिक है । इसमें जीवन में आई उलझनों का सामना कैसे करें पर खुले मन से दिये दिये गये 18 प्रवचन है । यद्यपि इसका आधार भगवत गीता है लेकिन यह हिन्दु दर्शन की बजाय प्रेरक दर्शन से जुडी है ।
कृष्ण कहते हैं- तुम्हारा अन्तर्हदय ही कुरुक्षेत्र हैं और वही धर्मक्षेत्र भी। युद्ध बाहय नहीं, चित की वृत्तियों से हो, स्वयं के तमस से हो। क्रान्ति हो अन्धकार में प्रकाश की। बाहय युद्ध से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकेगा। कृष्ण अन्तरमन में चल रहे युद्ध को जीतने की प्रेरणा देते हैं। वे अन्तर-युद्ध के प्रेरक हैं। अर्जुन तो प्रतीक है वीरत्व का, क्षात्रत्व का, फिसलने का।
यह आज के युवाओं को बोध देने में समर्थ है । यह आधुनिक शैली में निबन्ध है । इसमें कहीं संगठित धर्म या सम्प्रदाय का षोषण नहीं किया हुआ है । जैन सन्त होने से इसमें जैन उद्धरण बहुत है ।
लेखक श्री चन्द्रप्रभ एक प्रसिद्ध जैन सन्त है जो जैन सम्प्रदाय की सीमाओं से बंधे नहीं है । ध्यान व तत्व को जीवन में बहुत महत्व देते है । पुस्तक का प्रकाशन श्री जीतयशा फाउन्डेशन, जयपुर द्वारा किया गया है । पुस्तक की कीमत 50/- रू. है व पृष्ठ 256 है ।
3
मई
Posted by jayantijain in Art of Living, Book Review, Meditation, Personality, Spirituality. Tagged: असफलता, ऊर्जा, एकाग्रता, क्षमता, खुद- इलाज, तनावमुक्ति, तन्त्र, धन्यवाद, प्रार्थना, मन, सकारात्मकता. Leave a Comment
’’द आर्ट आॅफ तन्त्र’’ की विषयवस्तु तन्त्र के द्वारा जीवन-ऊर्जा के रूपान्तरण से संबंधित है । इसमें बताया गया है कि तन्त्र अध्यात्म से कैसे जुडा हुआ है ? तन्त्र के द्वारा जीवन ऊर्जा का रूपान्तरण हो सकता है, यह अच्छी तरह समझाया हुआ है । तन्त्र यौन-ऊर्जा को ब्रह्माण्डीय एवं रचनात्मक ऊर्जा मानता है । इसमें हिन्दु व बौद्ध तन्त्र को आधार बनाया हुआ है । शिवलिंग की पूजा क्यों की जाती है ? अघोरी मल या शव के टुकडे क्यों खातें है ? तान्त्रिक खोपडी में पानी क्यों पीते है ? खजुराहो के मंदिरोें में काम संबंधी मूर्तियां क्यों है ?उपरोक्त सभी प्रश्नों के सटीक जवाब इस पुस्तक में है । 
तन्त्र भोग को बुरा नहीं मानता है । यह सामान्य नैतिकता एवं शुचिता से उपर उठकर बताता है । योग और तन्त्र में अंतर यही है कि योग संयम के समय होश की बात करता है जबकि तन्त्र भोग में होश को अध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मानता है । योग संकल्प का मार्ग है जबकि तन्त्र समर्पण पर आधारित है ।
विकसित होती वैज्ञानिक दृष्टि से तन्त्र की बारिकियों को समझने के लेखक ने नये दृष्टिकोण दिये है । मनोवैज्ञानिक शोधों ने तन्त्र को समझने मंे मदद की है । तन्त्र विज्ञान को गूढ, जादू टोना, मारक, वशीकरण एवं रहस्यात्मक माना जाता है । यह पुस्तक उस दृष्टि को बदलती है । तान्त्रिकों की दुष्टता के कारण कोई शास्त्र बुरा नही हो जाता है । आज के तान्त्रिकों के आचरण को देखकर तन्त्र विज्ञान को नकारन उचित नही है ।
आज के तान्त्रिकों के योग, भोग, कामुकता, गणित, जादु और तत्वज्ञान/अध्यात्म का तन्त्र एक मिश्रण है जो आधुनिक युग के तनावों का सामना करने में हमारी मदद करता है । यह अपनी खोज में, स्वंय को जानने का व्यावहारिक मार्ग दिखाता है ।
संभोग एक कामुक कृत्य नही है, परन्तु अनुभव को गहराने हेतु है, स्त्री पुरूष के बीच आकर्षण एक भूख नहीं, आंखों की प्यास नहीं, एक दूसरे को समझने का अवसर देते है । प्यार एक प्रतिक्रिया नहीं, परन्तु सजगतापूर्वक पोषित करने वाली उत्कृष्ट रचना है । यह पूर्णता को महसूस कराने वाला अवसर है । इसके द्वारा असीम, अनन्त को अनुभव किया जा सकता है । अहं-शून्यता व समय शून्यता का बोध इसमें होता है । इस द्वार से भी स्वंय को खोजा जा सकता है ।
इस कृति को समझने के लिए भैरव विज्ञान तन्त्र व इस पर ओशो के प्रवचन सहायक है । लेखक तन्त्र कला का विशेषज्ञ है । तन्त्र संबंधी सामग्री को लेखक ने पश्चिम के दृष्टिकोण से लिखा है । पुस्तक सारी आर्ट पेपर पर छपी हुई है । इसमें तन्त्र सम्बन्धी 169 महत्वपूर्ण चित्र है लेकिन वे कामुकता को जगाने वाले नही है । तान्त्रिक यन्त्र, मन्त्र व देवियों के महत्वपूर्ण चित्र भी बहुत से है । यह तन्त्र शास्त्र पर अंग्रेजी में लिखा गया श्रेष्ठतम ग्रन्थ है ।
19
मार्च
Posted by jayantijain in Art of Living, Articles, Book Review, Personality, Spirituality, Stress Management, success, Uncategorized. Tagged: एकाग्रता, कैंसर, जीने की कला, नकारात्मता, मन, मनोवृती, मस्तिष्क, लेखक, सकारात्मकता. 2s टिप्पणियाँ
योगी कथामृत एन आॅटोबायोग्राफी आॅफ योगी का हिन्दी अनुवाद है । बीसवीं सदी की अध्यात्म की सौ प्रसिद्ध पुस्तकों में से यह एक है । यह योगदा सत्संग के प्रणेता परमहन्स योगानन्दजी की जीवनी है । इसमें उनके जन्म से लेकर योगदा की स्थापना तक का वर्णन सरल भाषा में किया हुआ है ।
बचपन में उनके जीवन मूल्य व परिवार का वर्णन है । ईश्वर की खोज योगानन्दजी ने कैसे की इसका वर्णन है । योगानन्दजी का अपने गुरू श्री युक्तेश्वरगिरिजी से मिलना, उनका दर्शन, उनसे दीक्षा लेने का इसमें विस्तृत वर्णन है । अपने गुरू के आत्मज्ञान के इस आन्दोलन को अमेरिका ले जाना व वहां पर इस कार्य को आगे बढाने का इतिहास इसमें है ।
’’क्रियायोग’’ की प्राचीनता, वैज्ञानिक महत्व एवं इसके सिद्धान्त का इसमें वर्णन है । भारतीय दर्शन, गीता एवं कृष्ण की सार्थकता व व्यवहारिकता पर इसमें बहुत कुछ लिखा हुआ है ।हिमालय में उन्होने अनेक तरह के चमत्कार देखे । योगानन्द जी निराहारी योगी से कैसे मिले, बिना आहार जीवन का संचालन कैसे होता है इसका वर्णन इसमें है । योगानन्दजी का अनेक सूक्ष्म सत्ताओं व दिव्य पुरूषों से संपर्क कब व कैसे हुआ, पानी पर चलने वाले, हवा में उडनेवाले संत व उसकी कला पर चर्चा इस पुस्तक में है । इन चमत्कारो के पीछे की सत्ताओं का उल्लेख विस्तार से है । अदृश्य को जानने व अध्यात्म को जीवन में उतारने की पे्ररणा देने वाली यह महान आदर्श पुस्तक है ।
इसमें गांधीजी को क्रिया योग की दीक्षा देने का वर्णन भी है । पुस्तक में अनेक फोटोग्राफ दिये हुए है । किताब की छपाई सुन्दर व अच्छे कागज पर की गयी है । किताब का मूल्य बहुत कम है । विश्व की छब्बीस भाषाओं में इस पुस्तक का अनुवाद हो चुका है । अनेक विश्वविद्यालयों में इसे पाठ्यपुस्तक के रूप में पढाया जाता है । अध्यात्म के विधार्र्थी के लिए यह एक श्रेष्ठ रचना है ।एक योगी की यह आदर्श जीवनी है । नास्तिक को आस्तिक बनाने में यह पुस्तक समर्थ है ।
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3
नव
Posted by jayantijain in Articles, Book Review, Life-Management, Personality, success, Uncategorized. Tagged: अनुभव, जीने की कला, जीवन प्रबन्धन, निर्णय, प्रसन्नता, मन, शिखर पर मिलेगे, सफलता. 6s टिप्पणियाँ
जीवन भर हम दूसरों के साथ कैसे रहें ,यह सीखतें हैं,लेकिन स्वयं को भूल जाते है। जबकि अपने प्रथम मित्र तो हम स्वयं हैं। यदि हम अपने साथ सुख एवं खुशी से नहीं रह सकते हैं तो जीवन का क्या अर्थ हैं। हमारी उपलब्धियां एवं जीतने का क्या अर्थ हैं। स्वयं को खोकर कुछ भी पा ले तो बेकार हैं। इस ’स्वयं’ को सुव्यवस्थित करने की कला का नाम जीवन प्रबन्धन हैं। हम स्वयं को पाकर ही जीवन को जान पाते हैं, यही है जीवन प्रबन्धन ।
हो सकता है, जीवन जीने के इन सूत्रो , विधियों, तरिको या उपायो से आप पहले से ही अवगत हों , फिर भी आप इनकी शक्ति को कम न समझे । ये वे उपाय हैं, जो आपको जीवन जीने की कला सिखा सकते हैं। मार्ग पर चलना प्रारंभ करेंगे आगे बढेंगे तभी तक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे
हमारा जीवन अपने मस्तिष्क देह,अर्थ , परिवार, समाज ,मृत्यु व चेतना संबद्व हैं। इसलिए यह पुस्तक सात भागों में विभाजित हैं। प्रत्येक भाग के साथ अतिरिक्त पाठय-सामग्री के रूप में कुछ श्रेष्ठ पुस्तकों का उल्लेख हैं। प्रत्येक पाठ के आगे -पिछे सम्बंधित विषयों पर अनमोल वचन दिए हुए हैं।
इसमें विद्ववान लेखक द्वारा कहानी, तर्क ,शोध, व्यक्तिगत अनुभव एवं उदारण द्वारा अपनी बात स्पष्ट की गई हैं। अपने जीवन में अतियोें से बचने व संतुलन स्थापित करने की विधा सिखाती है यह पुस्तक । जीवन प्रबंधन,धन और कैसे जिएं – को यह विस्तार से बताती हैं। हमें अपने लक्ष्य स्पष्ट करने, उन्हे प्राप्त करने में यह पुस्तक भरपुर मदद करती हैं।
प्रकाशन : प्रभात प्रकाशन , 4 /19 आसफ अली रोड , नई दिल्ली -110002
पेज – 176, कीमत – 125
27
अग
Posted by jayantijain in Art of Living, Book Review, Life-Management, Personality, Stress Management. Tagged: अवचेतन मन, अवचेतन मस्तिष्क, आत्मछवि, एकाग्रता, कृतज्ञता, क्षमता, प्रबल इच्छा, बदलना, भाग्य, मनोवृती, शिखर पर मिलेगे. 14s टिप्पणियाँ
राॅन्डा बर्न की चर्चित कृति ‘‘द सीक्रेट’’ इस सदी की प्रेरक किताबों में से एक है। इसमें सकारात्मक विचारों एवं भावनाओं द्वारा ही हम आगे बढ़ते है। इस रहस्य का वर्णन अमेरिका के प्रसिद्ध लेखकांे, उपदेशकों व विचारकों ने मिलकर किया है। जिनमें से जाॅन असाराफ, बेकविथ, ली ब्रोअर,जैक कैनफील्ड, डाॅ. जाॅन डेमार्टिनी, मैरी डायमंड, माइक डूली, बाॅब डाॅयल, डाॅ, जाॅन ग्रे, डाॅ. जाॅन हेजलिन, बिल हैरिस, डाॅ. बेन जाॅनसन, बाॅब प्राॅक्टर, जेम्स रे, डाॅ. जो विटाल, डाॅ. डेनिस वेटली, नील डोनाल्ड वैल्श और डाॅत्र फ्रेड एलन वोल्फ शामिल हैं। 
ऽ इन सभी विद्वानों ने अपने खुद के अनुभव एवं विचार प्रकट पुस्तक में किए है। यह एक अनुठा प्रयास है। पुस्तक में लिखा है कि
ऽ आप मानवीय ट्रांसमिशन टाॅवर की तरह हैं और अपने विचारों से फ्रीक्वेन्सी प्रसारित कर रहे हैं। अगर आप अपनी जिंदगी में कोई चीज बदलना चाहते हैं, तो अपने विचार फ्रीक्वेन्सी बदल लें।
ऽ आपके विचार वस्तुएँ बन जाते हैं।
ऽ आपके जीवन में जो भी चीजें आ रही हैं, उन्हें आप अपने जीवन में आकर्षित कर रहे हैं। और वे उन तस्वीरों द्वारा आपकी ओर आकर्षित हो रही हैं, जो आपके मस्तिष्क में है। यानी जो आप सोच रहे हैं।
ऽ आपके मस्तिष्क में जो भी चल रहा है, उसे आप अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। मनोभाव-परिवर्तक, जैसे सुखद यादें, सुंदर प्राकृतिक दृश्य या आपका पसंदीदा संगीत आपकी भावनाओं को बदल सकते हैं और पल भर में आपकी फ्रीक्वेन्सी बदल सकते हैं।
पुस्तक की छपाई एवं प्रिन्टिंग बहुत अच्छी है। आर्ट पेपर पर है। लेखक राॅन्डा बर्न ने इन सब सहलेखकों के अनुभवों को एक फिल्म भी बनाई है। इसे www.thesecret.tv पर देखा जा सकता है। इसकी सीडी भी उपलब्ध है। उक्त कृत्ति का हिन्दी अनुवाद मंजुल पब्लिशिंग हाउस ने छापा है।
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20
जुला
Posted by jayantijain in Book Review, Life-Management, Self-Healing, success. Tagged: अवचेतन मन, अवचेतन मस्तिष्क, एकाग्रता, क्षमता, निर्णय, मस्तिष्क, शिखर पर मिलेगे. 4s टिप्पणियाँ
यह पुस्तक बौद्धिक क्षमता के भरपूर विकास के लिए है। इसमें सोचने और सीखने की नई व रचनात्मक तकनीकें बतायी हुई है। इसमें मस्तिष्क के लिए लिखा गया है कि जैसा आप सोचते है उससे यह कहीं बेहतर है। साथ ही लिखा है कि हमारा मस्तिष्क कैसे काम करता है और उसका पूरा फायदा उठाने के लिए कैसे उसका इस्तेमाल करना चाहिए। हमने अपने मस्तिष्क के हार्ड वेयर के लिए उसके सोफ्ट वेयर को नहीं समझा है इसलिए हम उसका पूरा उपयोग नहीं कर पाते है।
स्मरण-शक्ति विकसित करने के लिए पहली बार माइंड मैप्स का वर्णन इसमें किया गया है। तेज और शीघ्रता से पढ़ने की विधि भी इसमें बतायी गई है। हम जितनी ज्यादा तेजी से पढ़ते है उतनी ज्यादा प्रेरणा हमें मिलती है और उससे एकाग्रता बढ़ती है।इसको पढ़ने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा जिससे आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा। मस्तिष्क का बुढ़ा होना मस्तिष्क के परिष्कृत होेने के बराबर है। अर्थात् उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क कमजोर नहीं होता है। अनेक प्रकार से यह हमारे मस्तिष्क के सोफ्ट वेयर को अपने पक्ष में प्रयोग करना सिखाती है।
इस पुस्तक 27 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है एवं 100 से अधिक देशों में प्रकाशित हो चुकी है। विद्यार्थियों के लिए यह बहुत काम की पुस्तक है।
टोनी बुजान माइंड मैप के अविष्कारक है। टोनी बुजान ओलम्पिक कोच पुरस्कार विजेता कवि, एथलीट तथा मार्शल आर्ट ब्लैक बेल्ट धारक है। वे 100 से अधिक घंटे तक विश्व टेलीविजेन पर अपना प्रोग्राम दे चुके है। टोनी बुजा़न विश्व भर मेें अपने विचारों, ज्ञान तथा स्मरण-शक्ति तकनीक के बारे में लेक्चर देते हैं, जिससे लाखों लोगों को अपनी प्रतिभाओं को निखारने में प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
27
अप्रै
Posted by jayantijain in Articles, Book Review, Meditation, Spirituality, Stress Management, success. Tagged: अध्यात्म, अवचेतन मन, आत्मछवि, जीने की कला, तनावमुक्ति, निर्णय, प्रार्थना, सकारात्मकता. 12s टिप्पणियाँ
मिखाइल नईमी द्वारा रचित पुस्तक ‘किताब-ए-मीरदाद’ अध्यात्म का सर्वोत्कृष्ट बीसवीं सदी की भाषा में लिखा ग्रन्थ है। ओशो ने एक बार कहा था कि किसी कारण वश सारे ग्रन्थ नष्ट हो जाए एवं यदि यह कृति शेष रहे तो सभ्यता फिर भी विकसित हो सकती है। चूकिं इस ग्रन्थ में सभी सत्यों का सार एवं जीवन का सार है। इसमें संस्कृति का उद्वार करने की कला एवं आत्म ज्ञान को प्राप्त करने की क्षमता है। यह एक ग्रन्थ नहीं बल्कि प्रकाश स्तम्भ है।
यह ग्रन्थ गीता,बाईबिल एवं कुरान के समकक्ष रखने योग्य है। इसमें आत्मिक उन्नति की विधि एक मठ की कथा की माध्यम से रखी हुई है। उक्त कृति में पहाड़ पर स्थापित पुराने मठ से जुड़ी कहानी है। प्रतिकात्मक भाषा में गूढ़ बातें इस पुस्तक मंे लिखी हुई है। साधक की दृष्टि को मजबूत कर उसकी राह के काँटे हटाती है। नकारात्मकता का सामना करने की समग्र विधि इसमंे है।
यह व्यवाहारिक पुस्तक नहीं है, संसार में रस जिनको आता हो उनके लिए यह नहीं हैै। जो संसार से थक गए है उनके लिए ज्योति प्रदायक है। जो नहीं कहा जा सकता है, उसे कहने में यह सक्षम है। परम सत्य को लेखक को कथा के रूप में बुनने में महारथ प्राप्त है। यह हमारे उपनिषदों की तरह है।
लेखक लिखता है कि हम जीने के लिए मर रहे है जबकि लेखक मरने के लिए जी रहा है। विचारणीय है कि जीने के लिए मरे या मरने के लिए जिए।
साथ ही इसमें लिखा है:
प्रेम ही प्रभु का विधान है।
तुम जीते हो ताकि तुम प्रेम करना सीख लो।
तुम प्रेम करते हो ताकि तुम जीना सीख लो।
मनुष्य को और कुछ सीखने की आवश्यकता नहीं।
और प्रेम करना क्या है, सिवाय इसके कि प्रेमी प्रियतम को
सदा के लिये अपने अन्दर लीन कर ले
ताकि दोनों एक हो जायें?
मिखाइल नईमी लेबनान के ईसाई परिवार में पैदा हुए, रुस में शिक्षा ग्रहण की एवं आगे की शिक्षा अमेरिका में। वहीं पर वे खलील जिब्रान से जुड़े एवं वहीं मातृभाषा अरबी की संस्कृति एवं साहित्य को नव जीवन प्रदान करने के लिए 1947 में द बुक आॅफ मीरदाद लिखी।
यह पुस्तक राधा स्वामी सत्संग व्यास, नई दिल्ली द्वारा हिन्दी में प्रकाशित है। वहाँ से इसे प्राप्त की जा सकती है। यदि अपनी तलाश है एवं बहुत से प्रयोग करने के कारण थक गए है तो यह पुस्तक आपको तेरा सकती है। तभी इसमें लिखा है कि जिनमें आत्म-विजय के लिए तड़प है उनके लिए यह आलोक-स्तम्भ और आश्रय है। बाकी सब इससे सावधान रहें।
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