रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रुप में सायरश मिस्त्री का चयन हुआ हैं। एक कमेटी ने 15 माह की जांच पड़ताल के बाद इनको चयनित किया हैं । पत्रकारो ने रतन टाटा से पूछा की किन गुणों के आधार पर आपने उनका चयन किया। रतन टाटा पहले तो टालते रहे लेकिन बाद में इनके चयन का कारण इनमे निम्न 4 विशेषताओं को बताया हैं।
1. कार्य सम्पादित करने की कला
हमारी सफलता हमारे काम करने की शैली तय करती हैं अर्थात काम करने का तरीका बहुत ही महत्वपूर्ण है । महर्षि पतंजलि ने भी ’’योगः कर्मसु कौशलं’’ लिखा हैं। उन्होनें तो कार्य सम्पादित करने की कौशल को ही योग बताया हैं। सभी उन्ही किताबों व अध्यापकों से पढ़ते है, कुछ अच्छे माक्र्स लाते हैं, कुछ फेल हो जाते हैं, क्यों ? सबके पास पढने के 5-7 घंटे ही होते हैं, मेहनत भी कई लोग करते हैं । फिर भी परिणाम भिन्न-भिन्न रहता हैं। इस सब के लिए पढ़ने का तरीका जिम्मेदार हैं। 
पढने का तरीका सबका भिन्न-2 होता है । पढते वक्त एकाग्र होना, पढ़ने में रूचि, स्पीड रिडिंग, स्मरण शक्ति को बढाने का तरीका जानना, मस्तिक की शक्तियों का ज्ञान आदि से पढ़ने की कला विकसित होती हैं। पढ़ने की दक्षता उसकी कला से आती हैं।
हम आज काम कैसे करते हैं ? पेड़ काटने के पूर्व कुल्हाड़ी की धार देखने की आवश्यकता हैं। जब आठ घंटे में पेड़ काटना हो तो छः घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाने पर सफलता के अवसर बढ़ जाते हैं।
कार्य करने की कला के मुख्य बिन्दु
कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना
कार्य को आनन्द से करना
बिना चिढे, बिना चिढाये कार्य करना
परिणाम की चिन्ता बगैर कार्य करना
अधूरा/बीच में कार्य नहीं छोड़ना
Related Posts:
अवचेतन का जादू :काम-वासना का शिकंजा
मेरी नई पुस्तक “जियो तो ऐसे जियो” का एक परिचय
( To be continued…)


Posted by Kamal on जनवरी 31, 2013 at 3:39 अपराह्न
Thats Right
Posted by Nepalnaama on अप्रैल 19, 2013 at 6:06 पूर्वाह्न
वाह