जनक सम्राट होकर ऋषिवत कैसे जीते थे?
विगत दस दिनों की मौन यात्रा में मन से मुलाकात हुई जिसकी प्रकृति व स्वभाव अनुभव किया जिससे जीवन में कितने उपद्रव होते है उनका बोध स्पष्ट हुआ। मन को समझ कर उसको शान्त किया जा सकता है व उसी से जीवन में आनन्द व शान्ति प्राप्त होते है।
मन को शान्त होने, आनन्द पाने, ईश्वर पाने या होने में मन सम्बन्घी ज्ञान की भूमिका है। वरन् यह इतना समर्थ है कि हमारा उपयोग कर लेता है। इससे आनन्द-शान्ति न लें तो यह जीवन में निरन्तर दौड़ता रहता है। अशान्त इसी को नहीं समझने के कारण होते है। यह विचारों के साथ तादात्म्य कर स्वयं बहुत कुछ बन जाता है। अहं यही बनता है। सारे उपद्रव करने में, शरीर को बचाने में, भटकाने में यह उस्ताद है। नित्य व स्थायी को भूला देता है। यश-प्रतिष्ठा, धन, स्त्री के प्रति मोह पैदा करता है। धर्म में आई सारी विकृतिया इसीकी बदौलत है। यह बस हमें उपर ही उपर भ्रमित किये रहता है। यह प्रत्येक चीज को देर-सबेर समस्या बना लेता हैं। यह कही तृप्त नहीं होता है। प्राप्त को बेकार व अप्राप्य को सदैव श्रेष्ठ बता कर उधर दौड़ाता रहता है। यह रूप बदलने, चाल बदलन में बड़ा माहिर हैै। यह अपनी बात व कथन पर अडि़ग नहीं रहता है।
मन की विशेषताओं को जान लेने पर हम इसको पहचान लेते है। अपने क्रिया-कलापों में, विचारों में यह कैसे घूसा बैठा है। इसकी पहचान कर इसके प्रति तटस्थ हो जाए तो यह स्वतः मर जाता है। मौन व साक्षी होकर ही इसको मिटाया जा सकता है। वरन् प्रत्येक उपाय में यह सूक्ष्म रूप से घुस जाता है। तभी तो संयम, नियम, संकल्पों की धज्जी यह रोज उड़ाता है। संयम को प्रतिष्ठा बना देता है। करुणा में अहं बन कर घूस जाता है। बुद्धपुरुषों की वाणी को यह सम्प्रदाय बना देता है। प्रत्येक को यह अपनी आँख से देखता है। यह अपने हिसाब से समझता व अर्थ निकालता है। तभी तो कहा जाता है कि मन के मैत न चालिए। लेकिन यह इतना कुशल है कि उस पर फेंके गए प्रत्येक पत्थर को अपना रंग दे देता है। तभी तो जीवन की चाबी इसने हथिया ली है। विचार आया नहीं, भाव आया नहीं, तर्क आया नहीं की गई भैंस पानी में, मन हमें शिकार बना लेता है।
(To be continued……)


Posted by chetankumar kanjibhai kuchara on दिसम्बर 21, 2011 at 9:28 अपराह्न
thanks a…
Posted by मन की तीसरी विशेषता तर्क आधारित सोचना एवं इसे अपने पक्ष में करें « उठो! जागो! on जनवरी 3, 2012 at 7:38 अपराह्न
[...] मन की तीन विशेषताएँ पहचाने एवं इसे अपन… [...]