मेरी नई पुस्तक “जियो तो ऐसे जियो” का एक परिचय

जीवन भर हम दूसरों के साथ कैसे रहें ,यह सीखतें हैं,लेकिन स्वयं को भूल जाते है। जबकि अपने प्रथम मित्र तो हम स्वयं हैं। यदि हम अपने साथ सुख एवं खुशी से नहीं रह सकते हैं तो जीवन का क्या अर्थ हैं। हमारी उपलब्धियां एवं जीतने का क्या अर्थ हैं। स्वयं को खोकर कुछ भी पा ले तो बेकार हैं। इस ’स्वयं’ को सुव्यवस्थित करने की कला का नाम जीवन प्रबन्धन हैं। हम स्वयं को पाकर ही जीवन को जान पाते हैं, यही है जीवन प्रबन्धन ।

हो सकता है, जीवन जीने के इन सूत्रो , विधियों, तरिको या उपायो से आप पहले से ही अवगत हों , फिर भी आप इनकी शक्ति को कम न समझे । ये वे उपाय हैं, जो आपको जीवन जीने की कला सिखा सकते हैं। मार्ग पर चलना प्रारंभ करेंगे आगे बढेंगे तभी तक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे
हमारा जीवन अपने मस्तिष्क देह,अर्थ , परिवार, समाज ,मृत्यु व चेतना संबद्व हैं। इसलिए यह पुस्तक सात भागों में विभाजित हैं। प्रत्येक भाग के साथ अतिरिक्त पाठय-सामग्री के रूप में कुछ श्रेष्ठ पुस्तकों का उल्लेख हैं। प्रत्येक पाठ के आगे -पिछे सम्बंधित विषयों पर अनमोल वचन दिए हुए हैं।

इसमें विद्ववान लेखक द्वारा कहानी, तर्क ,शोध, व्यक्तिगत अनुभव एवं उदारण द्वारा अपनी बात स्पष्ट की गई हैं। अपने जीवन में अतियोें से बचने व संतुलन स्थापित करने की विधा सिखाती है यह पुस्तक । जीवन प्रबंधन,धन और कैसे जिएं – को यह विस्तार से बताती हैं। हमें अपने लक्ष्य स्पष्ट करने, उन्हे प्राप्त करने में यह पुस्तक भरपुर मदद करती हैं।

 प्रकाशन :      प्रभात प्रकाशन , 4 /19  आसफ अली रोड ,  नई दिल्ली -110002

 पेज – 176,      कीमत – 125

2 responses to this post.

  1. Cover page is great. Book is too good.

    Congrets.

    Dr. Om

    Reply

  2. its a gr8 job sir g
    jai hind…

    Reply

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