हमारे जीवन में अंतर्यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे सारे कार्यो के लिए अंदर की सोच व भाव ही जिम्मेदारहै। अण्डा अगर बाहर से फूटे तो जीवन समाप्त होता है। यदि अण्डा भीतर से फूटे जो जीवन प्रारम्भ होता है।
अर्थात् जीवन में अन्तर्यात्रा जरूरी है। हमारे जीवन का सारा व्यवहार भीतर से तय होता है। हम अन्दर जो है वही बाहर प्रकट करते है। बाहर की सारी क्रान्ति भीतर के परिवर्तन के अभाव में व्यर्थ है। हमारा अन्तर्मन बहुत महत्वपूर्ण है। तभी तो बाहर के सारे परिवर्तन थोड़े समय बाद बेकार हो जाते है। तभी तो बदलने हेतु अन्दर से बदलना जरूरी है।
शान्त मन आपके बाहय जीवन के उपद्रवों को भी मिटा देता है। अन्तर्यात्रा द्वारा ही स्वयं को जानना होता है। दूसरों को भूलने के लिए अन्दर से अकेले होना पड़ता है। स्वयं का ऐकान्त मिल जाने पर किसी और की जरूरत नहीं पड़ती। हमारे सारे जीवन की अव्यवस्था के अन्तर्मन की अराजकता जिम्मेदार है। जब हम अन्दर से टूटे हुए होते है तो बाहर कुछ भी अच्छा नहीं लगता। जब हमें अपने पर भरोसा नहीं होता तो हम किसी ओर पर भरोसा नहीं कर सकते। इसीलिए किसी ने कहा है कि अपने भीतर देखो, उसे संभालों सब कुछ ठीक हो जाएगा ।
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Posted by kundan nagar on अगस्त 25, 2011 at 2:36 अपराह्न
Hamare karya safal karne ke man ki sakti ko jagakar chalne se safalata jaldi milti hai
Posted by आगे बढ़ने हेतु अपने मस्तिष्क का प्रयोग करों « उठो! जागो! on सितम्बर 21, 2011 at 9:17 पूर्वाह्न
[...] अपने भीतर देखो, उसे संभालों सफलता निश्… [...]
Posted by सुखी होने अन्तर्यात्रा करें व अन्तर्मन की सुनंे « उठो! जागो! on सितम्बर 15, 2012 at 6:48 अपराह्न
[...] के अनावश्यक बोझ लादे हुए हैं। Related posts: अपने भीतर देखो, उसे संभालों सफलता निश्… Share this:EmailFacebookTwitterLike this:LikeBe the first to like [...]