भावी जीवन साथी में कोनसे गुण होने चाहिए ?

शादी हेतु पाटर्नर में निम्न दस योग्यताओं  को देखना जरुरी है। इस हेतु मैं यहाँ कुछ योग्यताओं का उल्लेख कर रहा हूँ। जब हम पार्टनर को खोजने जाएँ तो निम्न बिन्दुओं पर जांचे व प्रत्येक बिन्दु पर मार्किंग कर उसका योग कर निर्णय लें। हम प्रत्येक अर्हता के लिए दस नम्बर रख सकते है। साठ प्रतिशत से अधिक नम्बर आने पर विवाह के सफल होने की प्रबल संभावना है।
1. समायोजन की क्षमता
इस एक मात्र गुण से विवाह सफल हो जाता है। समरयोजन की वृत्ति न हो और शेष सारे गुड़ हो तो वैवाहिक जीवन के नर्क बनने की पूरी संभावना है। शादी की सफलता पाटर्नर की समायोजन क्षमता पर निर्भर है। समझौता करने में दक्ष है या नहीं , अड़ियलपना इसमें ठीक नहीं है। जिसे सहन करना आता है वह सफलता पूर्वक शादी को निभा सकता है। इसे निभाने की कला कहते है।दो व्यक्ति अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आते है। अतः विचार व संस्कारों में अन्तर स्वाभाविक है। मतभेद होेने पर भी दूसरे की इज्जत कर स्वीकारने से गाड़ी सुखपूर्वक आगे बढ़ती है। दूसरा मत होने पर अस्वीकारना तो सहज है। लेकिन वाल्तेयर की बात ध्यान रखें कि हो सकता है कि मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊँ, फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करुँगा। अर्थात् दूसरे को ससम्मान अपना पक्ष रखने दो। इससे आधी समस्या हल हो जाती है।
विवाह की अधिकांश सफलता का आधार समायोजन की क्षमता है। एक पार्टनर दूसरे को कितना स्वीकार कर पाता है। क्योंकि सारी स्थितियाँ एक जैसी नहीं होती है। दो भिन्न संस्कारों में पले व्यक्ति एक साथ रहते है तो संघर्ष स्वाभाविक है। इसको अन्यथा न लेने की कला ही विवाह की सफलता है। वैसे भी विवाह एक समझौता है। अतः इसमें साथ निभाने की कला का बड़ा महत्व है।
स्वयं पर भरोसा कितना है? आत्मविश्वास की कमी वाला साथी ठीक नहीं रहता है। जीवन में आगे बढ़ने में आत्म विश्वास बहुत जरूरी है। आत्म विश्वास से भरा व्यक्ति ही समझौता कर सकता है।

2. समझदारी
वैसे समायोजन की क्षमता समझदारी से ही आती है। शादी एक सामाजिक संस्था है जो परिवार की बुनियाद है मनुष्य का पूरा जीवन इसके चारों और घूमता है। शादी से कत्र्तव्य और अधिकार मिलते है। अतः इनका निर्वहन समुचित तरीके से करने के लिए पाटर्नर का समझदार होना निहायत जरुरी है। यहाँ समझदारी का अर्थ दूसरे को समझने व समझाने की क्षमता है। एक साथी कैसे क्रिया करता है और उस  क्रिया की दूसरा साथी क्या प्रतिक्रिया करता है। इनकी समझ जरूरी है। परिस्थिति को समझ कर सही व्यवहार करना एक कला है जिसका ज्ञान वैवाहिक सफलता के लिए जरुरी है। पाटर्नर को दूसरे पाटर्नर के मन की भाषा का ज्ञान होना चाहिए। दोनों एक भाषा समझते हों। परस्पर समझ के न होने पर जीवन नरक बन सकता है। समझदारी से विनम्रता बढ़ती है। इसे से मिलन सारिता भी बढ़ती है। समझदारी सारे गुणों की माँ है।

(To be continued)

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5 responses to this post.

  1. यह योग्यताएं क्या महिला और पुरुषों दोनो पे एक समान लागू होंगीं? भारतीय संधर्ब में सारे व्यवाहिक नियम महिलों पे लागू होते हैं और पुरुषों के लिए सिर्फ़ स्थाई नौकरी का होना ही काफ़ी समझा जाता है.

    जीवनसाथी का कोन्सेपटेटु लाई ही पाश्‍चतया है, अपने यह्न तो बहू सास ससुर की सेवा हेतु लाई जाती है. बेटे की आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँ तो उसका भाग्या समझो.

    Peace,
    Desi Girl

    Reply

  2. Definitely applications of qualities r needed in both partners.You are correct at certain extent but now time has changed.

    Reply

  3. If you make it clear that these are required by BOTH the partners, it would help your readers. Most couples and families are used to thinking that only one partner needs to make all the effort to make an Indian marriage work.

    Reply

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