क्षमा माँगना सरलता है, क्षमा करना बड़प्पन है। वैसे ये दोनों जूदा नहीं है। एक दूसरे से जुड़ें है। क्षमा माँगने से प्रकट है कि हम ने भी उनको क्षमा कर दिया है। क्षमा करने से हमारा अवचेतन इसके भार से मुक्त हो जाता है। जो अज्ञात का दबाव हमारे मन पर था वो कम हो जाता है। इससे व्यक्ति हल्का हो जाता है एवं प्रसन्नता बढ़ जाती है।
23 सित
क्षमा कर अवचेतन के तनाव से मुक्त हो
मिच्छामि दुक्कड़म्–मैं क्षमा करता हूँ आपसे क्षमा की याचना करता हूँ।
क्षमा माँगना व्यवहार नहीं, औपचारिकता नहीं, कर्मकाण्ड नहीं, रस्य अदामगी नहीं, इन सबके पार दिल की घटना है। सूक्ष्मता है, ऐहसास है, रूह की बात है। अपनत्व है, शब्दों के पार का संप्रेषण है।
क्षमा माँगना या करना बौद्धिक कृत्य नहीं है। यह एक भाव हैं जो ह्नदय से जुड़ा है। अतः उसका विश्लेषण करना बेकार है। क्या हम क्षमा माँगते या करते वक्त उस भाव दशा में होते है, यही महत्वपूर्ण है। इसके प्रति सजगता ही ध्यान है। अर्थात् पूर्णता में क्षमा करना ध्यान करना है। विराट से जुड़ना है।
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