मनीष जैन (शिक्षान्तर) : मेरे स्कूल में सिखाये गये 10 झूठ

10. पश्चिमी विज्ञान व तकनीकीकरण ही हमारी सब समस्याओं का हल कर सकती है।
9. बड़े बम व बड़ी सेना से ही हमारी सुरक्षा हो सकती है एवं उन्हीं के द्वारा हमें पूर्ण शान्ति मिल सकती है।
8. प्रतिस्पर्धा व निजी स्वार्थ से ही मेरी क्षमता का विकास हो सकता है। मुझे जीत और खुशी तभी मिल सकती है जब दूसरों की हार हो।
7.पश्चिमी संसदीय लोकतन्त्र की व्यवस्था आम आदमी को असली निर्णय लेने की ‘शक्ति’ एवं ‘चोईस’ प्रदान करती है एवं अपनी आवाज को बुलन्द करने के अवसर प्रदान करती है। हमारी पुराने समय की राजा-महराजाओं की व्यवस्था तानाशाही थी और वर्तमान की व्यवस्था हमको पूर्ण स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्रदान करती है।
6. जीवन के सभी सुख पैसे से ही प्राप्त हो सकते हैं, हम पैसे के बिना कुछ नहीं कर सकते। अगर देश के कुछ लोग अमीर हो जायेंगे तो उनका धन अपने आप धीरे-धीरे सब गरीब लोग के पास पहुंच जायेगा और उससे फायदा हो जायेगा।
5. गरीबी का कारण गरीब लोगों की आलस व बेवकूफी है; अमेरिका व यूरोप (खासकर के गोरी चमड़ी वाले) के लोग आर्थिक दृष्टि से अमीर इसलिए हैं क्योंकि वह ज्यादा बु़ि़द्धमान व मेहनती है।
4. प्रकृति हमारी दुश्मन है क्योंकि यह हमें बहुत नुक्सान पहुँचाती है। मुझे उसे दबाकर, शोषित कर अपने नियंत्रण मंे रखना चाहिये।
3. अंग्रेजी भाषा उच्च व परिष्कृत है और मेरी स्थानीय भाषा मेवाड़ी पिछड़ी और एकांगी है।
2. मेरे जीवन का मकसद उपभोग है, मैं जितना ज्यादा उपभोग करुँगा उतनी ज्यादा जीवन में सफलता हासिल करुँगा।
1. भारत 1947 से आजाद है और मैं आजाद प्राणी हूँ।
(शिक्षान्तर  आंदोलन द्वारा प्रकाशित ‘‘स्कूली व्यवस्था व मानसिकता का प्रतिरोध’’ से साभार)

क्या आपको  अपने स्कूल में सिखाये गए किसी झूठ  की याद आती हें ? कृपया लिखे

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6 responses to this post.

  1. [...] मनीष जैन (शिक्षान्तर) : मेरे स्कूल में स… [...]

    Reply

  2. Posted by हसराज बोकाडिया on जून 2, 2010 at 11:05 पूर्वाह्न

    बिलकूल सही।
    सच्चाई के नाम पर ये जूठ ही परोसे जा रहे है।

    Reply

  3. Posted by Dr. Dileep Dhing on जून 4, 2010 at 1:17 अपराह्न

    I know first ever about Shikshantar. I am thankful to Respected Shri Jayanti Jain for introducing to movement of Shri Manish Jain. My wishes for all success in you mission Shikshantar.

    Reply

  4. I am bit agree with you.
    But actuallty in the practical life some points are right.

    Reply

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