समय-प्रबन्धन ही ‘जीवन-प्रबन्धन’ है।
आज का आदमी भाग रहा है। सदैव जल्दबाजी में है, उसके पास रुककर विचार करने का समय नहीं है। यदि वह भागता रहा तो प्राथमिकताओं का निर्धारण नहीं कर सकता है।
लक्ष्य के अभाव में जीवन व्यर्थ है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। यदि आप अपनी कार्यो की प्रायोरीटि तय नहीं करते है तो कार्य आपको घूमाते रहते है। सदैव व्यस्त भी रहते है, और पहुँचते कहीं नहीं है। जरुरी कार्य को पहचानना आना चाहिए। कार्य का महत्व आपको दिखता क्यों नहीं है?कार्य के मूल्य के अनुसार कार्य की प्राथमिकता का निर्णय करो। अहमियत के अनुसार कार्य करो।वरना व्यस्तता आपके महत्तवपूर्ण कार्यो की बलि ले लेगी। अधिक महत्वपूर्ण व जरुरी काम सबसे पहले करें। अन्यथा गैर जरुरी कार्य में आप अपना समय खो देगे। जीवन में समय तो सीमित है। कार्य असीमित है। अतः उनके बीच तालमेल हेतु प्राथतिकता अनुसार कार्य करना जरुरी है।
चाल्र्स श्वाब ने एंड्रयू कार्नेगी को प्राथमिकता का पाठ पढ़ाया था। एंड्रयू कारनेगी, अपने जमाने के स्टील किंग
उस विशेषज्ञ ने एक सप्ताह उसके साथ रहने के पश्चात् अपनी राय दी। सारे कार्याें को उनकी प्राथमिकता के अनुसार व्यवस्थित करें। प्राथमिकता तय करने के लिए ।A1 A2 A3 B1 B2 B3 जैसे शब्द प्रत्येक कार्य के सम्मुख लिखें। 1 2 3 सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य होगा। इसे पहले और सर्वश्रेष्ठ ढंग से करें। इसी प्रकार आगे के दूसरे कार्याें को संपादित करें।
चाल्र्स ने इसी तकनीक का प्रयोग किया और कुछ ही दिनों में अपने कार्याें को व्यवस्थित करने में भारी सफलता प्राप्त की। उसने 25,000 डालर का भुगतान, समय-विशेषज्ञ को इस फार्मूले और उसके परामर्श के लिये किया।
आप भी इस फार्मूले का उपयोग कर लाभान्वित हो सकते हंै। यदि आप अपने कार्याें को प्राथमिकता से, उपलब्ध समय के अनुसार नियोजित कर सकते हैं तो आप कम समय में अधिक कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे। वास्तव में, सफल- प्रबन्धन और कुछ नहीं है, यह समय-प्रबन्धन का ही दूसरा नाम है। पुनः यह कहा जा सकता है कि समय-प्रबन्धन ही ‘जीवन-प्रबन्धन’ है।
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Posted by dr.aalok dayaram on मार्च 13, 2010 at 2:18 पूर्वाह्न
“समय प्रबन्धन ही जीवन प्रबन्धन है”बहुत ही सारगर्भित है आपका आर्टिकल।बधाई॒
Posted by शरद कोकास् on मार्च 13, 2010 at 12:03 अपराह्न
समय प्रबन्धन पर आपका यह महत्वपूर्ण आलेख है } आप जो व्यावहारिक टिप्स देते है वह अच्छी लगती हैं । जैसे कार्य के आगे 123 लिखना ।
Posted by सफलता प्राप्ति में निर्णय क्षमता का महत्व « उठो! जागो! on अप्रैल 8, 2010 at 7:26 पूर्वाह्न
[...] [...]
Posted by Pradeep Bhardwaj Kavi on जून 26, 2010 at 2:53 अपराह्न
हॆ रिषिवर! अब्दुल कलाम,
तॆरॆ चिन्तन कॊ प्रणाम|
यॆ राष्ट्र ऊर्जावान बनॆ,
है वन्दनीय तॆरा पैगाम|| __ प्रदीप भारद्वाज मॊदीनगर 09456039285
Posted by सफलता पर एन्थनी राॅबिन्स की विश्व प्रसिद्ध कृति अवेकन द जाइन्ट विदिन « उठो! जागो! on सितम्बर 3, 2010 at 11:53 अपराह्न
[...] [...]
Posted by Mukesh sharma on दिसम्बर 11, 2011 at 2:07 अपराह्न
Sir,
me kisi b kaam ko bahut dino tak nahi kar sakta,jisse mujhe asafalta hi milti he,apke articles bahut achche lage.plz tell me