सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। यह सर्व कल्याणकारी मंत्र है। मेरी शान्ति, सन्तुष्टि, तृप्ति और प्रगति का अगर कोई प्रथम पहलू है, तो वह सकारात्मक सोच ही है। सकारात्मक सोच ही मनुष्य का पहला धर्म है और यही उसकी आराधना का बीज मंत्र है।
सकारात्मक सोच का स्वामी सदा धार्मिक ही होता है। सकारात्मकता से बढ़कर कोई पुण्य नहीं और नकारात्मकता से बढ़कर कोई पाप नहीं।, सकारात्मकता से बढ़कर कोई धर्म नहीं और नकारात्मकता से बढ़कर कोई अधर्म नहीं। कोई अगर पूछे कि मानसिक शान्ति और तनाव मुक्ति की दवा क्या है, तो सीधा सा जवाब होगा – सकारात्मक सोच। अनगिनत लोगों पर इस मंत्र का उपयोग किया गया है और आज तक यह मंत्र कभी निष्फल नहीं हुआ है। सकारात्मक सोच का अभाव ही मनुष्य की निष्फलता का मूल कारण है।


Posted by ajit gupta on अक्टूबर 12, 2009 at 5:49 अपराह्न
सफलता का यही एकमात्र सूत्र है। सकारात्मक व्यक्ति केवल क्रिया करता है लेकिन नकारात्मक व्यक्ति प्रतिक्रिया करता है। श्रेष्ठ विचार, बधाई।
Posted by अनुनाद सिंह on अक्टूबर 12, 2009 at 5:56 अपराह्न
आपकी बात सोलहो आने सच है। लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहने के लिये क्या किया जाना चाहिये?
Posted by jayantijain on अक्टूबर 12, 2009 at 6:14 अपराह्न
till the limit fight otherwise accept -is one solutions,sir
Posted by Chandra Mohan Gupta on अक्टूबर 12, 2009 at 10:10 अपराह्न
मेरी शान्ति, सन्तुष्टि, तृप्ति और प्रगति का अगर कोई प्रथम पहलू है, तो वह सकारात्मक सोच ही है। सकारात्मक सोच ही मनुष्य का पहला धर्म है और यही उसकी आराधना का बीज मंत्र है।
पर सकारात्मक सोंच भी विवादित है.जहाँ त्यागी को देने, भला करने के प्रयासों में सकारात्मकता दिखती हैं वहीँ लोभी को और पाने के गलत सही सब तरह के प्रयासों में……………..
लेख अच्छा आयर सकारात्मक है.
बधाई.
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
http://www.cmgupta.blogspot.com
Posted by सकारात्मक होने में मन की बाधा कैसे पार करे? « उठो! जागो! on नवम्बर 20, 2009 at 7:56 अपराह्न
[...] [...]
Posted by Rajendra on सितम्बर 25, 2010 at 10:01 पूर्वाह्न
कोई अगर पूछे कि मानसिक शान्ति और तनाव मुक्ति की दवा क्या है, तो सीधा सा जवाब होगा – सकारात्मक सोच।
Posted by sohan on नवम्बर 16, 2010 at 6:42 अपराह्न
vah ! positive thinking is the best way for fight from fear and it also required in the life.
Posted by Sandeep Bhattacharya Kondagaon C.G. on फ़रवरी 8, 2011 at 9:40 अपराह्न
positive thinking is the best thing for a big success. keep it forever.
Posted by Devendra Kumar Patel on अप्रैल 24, 2011 at 8:40 अपराह्न
its a short and nice post about positive thinking…everyone must have to adopt it in their nature, and it will really helps everyone to develop their personality in front of others.
Posted by yashwant009 on अगस्त 7, 2011 at 6:16 अपराह्न
कल 08/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
Posted by anupama tripathi on अगस्त 8, 2011 at 7:48 पूर्वाह्न
bilkul theek baat likhi hai ….
shubhkamnayen…
Posted by bhairawi on अगस्त 8, 2011 at 8:10 पूर्वाह्न
sahi boto ko bahut achche se varnit kiya hai………badhiya
Posted by prerna argal on अगस्त 8, 2011 at 10:45 पूर्वाह्न
सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।sach kaha aapne nice post,badhaai aapko . “ब्लोगर्स मीट वीकली {३}” के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।
Posted by sangeeta swarup on अगस्त 8, 2011 at 10:56 पूर्वाह्न
बिल्कुल सही कहा है ..जिसकी सोच सकारात्मक होती है वो निश्चय ही ज़िंदगी में सफल होता है ..
Posted by rekha jha on अगस्त 8, 2011 at 3:21 अपराह्न
सही कहा आपने ….सफल व्यक्ति बनने से पहले हमारी सोच को एक सकारात्मक दिशा देना आवश्यक होता है
Posted by prerna argal on अगस्त 8, 2011 at 8:28 अपराह्न
सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न केवल व्यक्ति और समाज की, वरन् समग्र विश्व की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।sach kaha aapne nice post,badhaai aapko.
/ ब्लोगर्स मीट वीकली (३) में सभी ब्लोगर्स को एक ही मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है / आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ कोब्लॉगर्स मीट वीकली (3) Happy Friendship Day में आप आमंत्रित हैं /
Posted by Anand on सितम्बर 4, 2011 at 5:01 अपराह्न
Bahut acha laga padhakar.