मैंने अपने अवचेतन मन का उपयोग अनजाने में ही सन् 1978 में किया । जब मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ता था। मेरी बचपन में मँगनी हो गई थी। मेरा परिवार शादी करने हेतु मुझ पर दबाव डाल रहा था। मेरी माँ को उच्च रक्तचाप था। पिताजी सामाजिक दबावों से व्यथित थे। इन्हीं कारणों से, मैंने अपने माता-पिता से बात नहीं की। साथ ही मुझे वह लड़की भी पसन्द नहीं थी। मैं आई.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परन्तु मैं इस अनिर्णय की स्थिति से परेशान था।
उस समय मैं अवचेतन मन की शक्ति से परिचित नहीं था। पर मैंने निश्चय किया कि, “ मैं, एक महीने में निर्णय कर लूँगा कि मुझे विवाह करना है या नहीं।” कई दिनों तक सोने से पहले बिस्तर में पड़े़-पडे़ मैं स्वयं से पूछता, “क्या मुझे इस लड़की से विवाह करना चाहिये ?” अचानक 31 मार्च, 1978 की रात्रि को, जब मैं नींद में था मुझे एक तेज प्रकाश का आभास मेरे कमरे में हुआ। एवं साथ ही मैंने एक आवाज सुनी, इस लड़की से शादी कर लो, भविष्य में इससे तुम्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी।
आज मैं समझ पाया हूँ कि यह निर्णय मेरे अवचेतन मन से आया था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उस लड़की से विवाह का प्रस्ताव मेरे अवचेतन की शक्ति से प्रभावित था। और वह निर्णय मेरे जीवन में सफल एवं सकारात्मक रूप में उचित सिद्ध हुआ है।
22 सित


Posted by काव्या शुक्ला on सितम्बर 24, 2009 at 7:54 पूर्वाह्न
प्रेरक पोस्ट।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।
Posted by प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर on दिसम्बर 29, 2009 at 4:14 अपराह्न
भगवान !!
हमें भी कुछ ऐसा ही काहे नहीं दिखाते हो ???
शायद आप पर भगवान की कृपा हो?
Posted by Cafe World Hacks on अप्रैल 10, 2010 at 5:51 पूर्वाह्न
Nice blog, this a superb post
Posted by लक्ष्य प्राप्ति में बाधा आसक्ति की हैः आसक्ति ने अवचेतन की दिशा बदल दी जिसने मुझे आई ए एस नहीं बनन on अगस्त 13, 2010 at 6:49 अपराह्न
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Posted by sunil fulsing machalkar on अगस्त 31, 2010 at 7:42 अपराह्न
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Posted by jayantijain on अगस्त 31, 2010 at 8:21 अपराह्न
hi sunil ji
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Posted by Denna Reifler on दिसम्बर 1, 2010 at 12:57 पूर्वाह्न
All are architects of Fate, Working in these walls of Time; Some with massive deeds and great, Some with ornaments of rhyme.