लक्ष्य को समझाने पर अंधी लड़की कैसे प्रेरित हुई ?

November 23, 2009

मैं एक 12 वर्ष की लड़की तसनीम के बारे में बताना चाहूँगा। 6 वर्ष पहले एक गांव छोड़ कर शहर में आकर बस गये। तब से वह अंध विद्यालय में निरन्तर पढ़ने जा रही थी। पर वह कुछ भी नहीं सीख पाई । उसके माता-पिता ने सोचा कि वह दिमाग से कमजोर है। अतः उन्होंने शहर के कई चिकित्सकों से परामर्श लिया, पर सब व्यर्थ रहा। फिर उन्होंने मुम्बई हाॅस्पिटल में भी दिखाया। कोई लाभ नहीं हुआ।

एक दिन वह लड़की अपने पिता के साथ मेरे घर आई। मंैने उससे पूछा कि वह क्यों नहीं पढ़ना चाहती है? उसका उत्तर था, ‘‘पढ़ने का कोई लाभ नहीं है।’’ मैंने उसे उसकी बुआ अजब के जीवन के बारे में बताया। उसके केरियर के बारे में बताया कि कैसे अजब ने लकवाग्रस्त होते हुए भी अपना केरियर बनाया। उससे पूछा कि क्यों तुम्हारी मां घर में ही रहती हैं और तुम्हारी बुआ नौकरी करती हैं। मंैने दोनों का अन्तर उसे समझाया। जब उसे समझ में आया कि अजब, उसकी बुआ,अधिकारी अपनी पढ़ाई की वजह से बनी हुई हैं। वह किसी पर आश्रित नहीं हंै। और चूंकि उसकी मां पढ़ी-लिखी नहीं हंै, उसे घर में ही रहना पड़ता हंै। मंैने, तसनीम को समझाया कि उसमें और उसकी माँ में भी अन्तर है।

मंैने उससे कुछ प्रश्न किये,‘‘तुमसे कौन शादी करेगा ?’’ ‘‘एक दिन जब तुम्हारे माता-पिता नहीं होंगे, कौन तुम्हारी देख-भाल करेगा ?’’ ‘‘क्या तुम अपनी बुआ की तरह अधिकारी बनना चाहोगी ?’’अजब अधिकारी कैसे बनी, यह मंैने उसे समझाया। इस पाँच मिनिट की वार्ता से वह सीखने-पढ़ने को तैयार हो गई। उसके पश्चात् उसने एक माह में ही वह सब सीख लिया जो वह पिछले पाँच वर्षों में नहीं सीख सकी थी। मंैने सिर्फ अध्ययन की आवश्यकता की प्रेरणा दी। मंैने उसकी मान्यताओं को, विश्वासों को बदला। मंैने आधारभूत आवश्यकताओं पर प्रहार किया और वह प्रेरित हो गई। तसनीम अभी 44-रजा काॅलोनी, अम्बामाता स्कीम में रहती है।



सकारात्मक होने मन की बाधा कैसे पार करे?

November 20, 2009

जीवन में 99 के फेर में न पडे, निन्यानवें एक का 99 गुना होता हैं

ब्लॉग पढने के दौरान नकारात्मकता आपको पढते हुए भी पढने नहीं देगी । शब्दों को समझते हुए भी सकारात्मक होने में कठिनाई अनुभव करेंगे । आप स्वयं प्रतिरोध कर ग्रहण नहीं कर सकते हैं। हमारा मन सदैव अपने अनुकूल बात को हो स्वीकार करता हैं। अपने प्रतिकुल बात का वह विरोध करता हैं।नई बात से बचने का मार्ग सोच लेता हैं,जैसा कि वह कहेगा -मात्र सकारात्मक होने से क्या होगा ?

सकारात्मकता एक आदर्श हैं। इसे व्यवहार में लाना कठिन है। जब सब लोग नकारात्मक है तो   मैं कैसे सकारात्मक बन सकता हूँ? सकारात्मक होने से मैं पिछड़ जाउंगा ,लोग मुझे धोखा दें देंगे ।मेरी परिस्थितियां बहुत खराब हैं,इनमें सकारात्मक होना कठिन हैं । कुछ मित्रों का मन उल्टे तर्क भी खडे. कर सकता हैं । हम तो सकारात्मक ही हैं।ंहम तो सब जानते हैं।

हमारे भीतर एक सतत बडबडाहट चलती रहती हैं। हम अपने ही विचारो से भरे हुए हैं। अनियंत्रित विचारों के तले दबा व्यकित पढ कर भी पढ नहीं सकता । अपनी सोच प्रक्रिया में डूबा मन कूछ सीख नही सकता हैं।

सकारात्मकता के खिलाफ तर्क मत खडे करिये ।ं तर्क खडे करने वाले मन की चालाकियो को दखने का प्रयास करें। मन सदेव सरल रास्ता पसंद करता हैं। ढलान पर फिसलना सरल हैं । नकारात्मक बने रहना ढलान पर लुढकना हैं। सकारात्मक होना चढाई पर चढने जैसा हैं, जो कि कठिन हैं। अपनी नकारात्कता को किसी भी तर्क से बचाओ मत । आपको सकारात्मक होने हेतु कुछ ठोस प्रयत्न करने हैं। सकारात्मकता एक शब्द नही ,जीवन शैली हैं।यह चर्चा का विषय नही प्रयोग का उपक्रम हैं। यह कोई आदर्श नहीं ,अस्तित्वगत सत्य हैं। यह कोई दर्शन नहीं ,यह जीवन जीने की कला का मूल मंत्र हैं। यह कोई धारणा नहीं ,बल्कि जीवन को बदलने का क्रान्तिकारी सूत्र हैं।

जीवन में 99 के फेर में न पडे । 100 में से एक कम हो गया तो रोने या भटकने की जरूरत नही हैं। निन्यानवें कोई कोई कम चिज नहीं होती ।निन्यानवें एक का 99 गुना होता हैं। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

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सफलता का व्यावहारिक मन्त्र -सकारात्मक सोच

 

 




जीवन जीने की कला: चाय पीने से कैसे सीखे?

November 17, 2009

चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ?

जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई जाती हैं।चाय पीते हुए उसका उत्सव मनाओ। चाय का पूरा लुत्फ उठाओ। चाय बनाने तक को देखो। धीरें-धीरें हर चीज करों।  बर्तनों तक का स्पर्श अनुभव करो । चाय की महक महसूस करो व माहोल के साथ तादात्मय व सजगता रखो । संवेदन शीलता को फैलने दो। सजगता के साथ चाय का स्वाद लो।ं अपनी इन्द्रियों द्वारा होने वाली प्रतिक्रियाओं के प्रति सजग होओं। यह स्वयं को जगाता हैं।
चाय की चुस्की धीरे से लो ।  उसको आपके भीतर फेल जाने दो , उसकी मिठास , महक व कषैलेपन को देखो । उसके ज्ञाता-दृष्टा बनो। विचारो को  अन्यत्र  जाने दों,साथ ही उनका अवलोकन करते रहो । इससे आपके भीतर लीला भाव बढेगा।  तुम पुरे वहा उपस्थित रहो। चाय बनाना व पीना एक ध्यान बनाओं। यह घटना जब दिव्य होगी तभी आपका जीवन दिव्य होगा । तुच्छ व्यक्ति, छोटी घटनाओ से  नही बल्कि छोटी घटनाओं के प्रति लापरवाही से तुच्छ बनता है। प्रत्येक घटना को अति सुन्दर,भव्य व दिव्य मानो, आपके भीतर सुन्दरता , महानता, दिव्यता इस बहाने प्रकट होगी ।इसी से जीवन का रहस्य प्रकट होगा।
चाय पीने के आपके क्या अनुभव हैं?

चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ?जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई जाती हैं।चाय पीते हुए उसका उत्सव मनाओ। चाय का पूरा लुत्फ उठाओ। चाय बनाने तक को देखो। धीरें-धीरें हर चीज करों।  बर्तनों तक का स्पर्श अनुभव करो । चाय की महक महसूस करो व माहोल के साथ तादात्मय व सजगता रखो । संवेदन शीलता को फैलने दो। सजगता के साथ चाय का स्वाद लो।ं अपनी इन्द्रियों द्वारा होने वाली प्रतिक्रियाओं के प्रति सजग होओं। यह स्वयं को जगाता हैं।  चाय की चुस्की धीरे से लो ।  उसको आपके भीतर फेल जाने दो, उसकी मिठास , महक व कषैलेपन को देखो । उसके ज्ञाता-दृष्टा बनो। विचारो को  अन्यत्र  जाने दों,साथ ही उनका अवलोकन करते रहो । इससे आपके भीतर लीला भाव बढेगा।  तुम पुरे वहाॅ उपस्थित रहो। चाय बनाना व पीना एक ध्यान बनाओं। यह घटना जब दिव्य होगी तभी आपका जीवन दिव्य होगा । तुच्छ व्यक्ति, छोटी घटनाओ से  नही बल्कि छोटी घटनाओं के प्रति लापरवाही से तुच्छ बनता है। प्रत्येक घटना को अति सुन्दर,भव्य व दिव्य मानो, आपके भीतर सुन्दरता , महानता, दिव्यता इस बहाने प्रकट होगी ।इसी से जीवन का रहस्य प्रकट होगा।

चाय पीने के आपके क्या अनुभव हैं?


कड़ी मेहनत,सतत मेहनत एवं दृढ़ता से सफलता

November 13, 2009

शिखर पर काफ़ी खाली स्थान है किन्तु वहाँ बैठे-बैठे नहीं पहुँचा जा सकता। मेरी डायरी से कुछ उदाहरण निरंतर मेहनत के देखिये जो मुझे प्रेरित करते हैं:

  • एन. वेबस्टर ने 30 वर्षांे तक लगातार कार्य किया तब पहलेे अंग्रेजी शब्दकोष की रचना विश्व में हो पाई।
  • जान वानक्राफ्ट ने 23 वर्षाें तक लगातार कार्य करके अमेरिकन इतिहास लिखा।
  • गिब्बन ने 20 वर्षों तक लगातार कार्य कर “फाॅल आॅफ रोम एम्पायर” पुस्तक लिखी।
  • जेम्स वाॅट ने 20 वर्षाे तक कार्य करके भाप के इंजिन का आविष्कार किया।
  • जाॅर्ज स्टीफेन्सन ने लगातार 15 वर्ष तक रेल इंजिन को विकसित करने हेतु काम किया।
  • विलियम हार्वे ने लगातार 8 वर्ष तक रक्त-संचरण प्रणाली का अध्ययन किया।
  • हेरी टाउडर एक स्काटिश हास्य कलाकार (काॅमेडियन) था। उसने एक गाने का 10,000 बार अभ्यास किया।
  • विक्टर ह्यूगो ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास “नोत्र डम-दी पेरिस” के पूरा होने तक कपड़े नहीं बदले।
  • एलेक्जेंडर डूमा ने रोज 18 घंटे तक लेखन कार्य किया और यह प्रक्रिया 40 वर्षांे तक चली।
  • मोहमूद गज़नी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया, जब तक उसे सफलता नहीं मिल गई।
  • टाल्सटाय ने “वार एंड पीस” को प्रकाशक को देने से पहले अस्सी बार लिखा।
  • विवेकानन्द ने अपने साधना-काल में केवल दो घंटे प्रतिदिन निद्रा ली।
  • डॅा. राधाकृष्णन जब न्ण्ैण्ैण्त्ण् में राजदूत थे, तब 18 घंटे प्रतिदिन पढ़ते थे।
  • मिसेज इन्दिरा गाँधी ने 1980 के चुनाव में एक दिन में 64 भाषण दिये।उन्हे उस दिन नाश्ते का भी समय नहीं मिला।

स्वयं से पूछिये: कितने प्रयत्न आप कर रहे हैं?



आत्मछवि बदले और अपने भाग्य विधाता बने

November 10, 2009

मेरे मित्र राज बापना ने उठो जागो देखकर पुछा कि 250 पेज की क्र्रति का सार एक वाक्य में बताओ ?तब में सोच में पड गया और थोडी देर बाद बताया कि मैने इस पुस्तक मे आत्म छवि  बढाने के बारे में लिखा है । सफलता प्राप्ति का जनक आत्मछवि है ।हम अपने मन में व्याप्त अपनी तसवीर से सन्चालित होते है ।हमारी तस्वीर का आधार हमारी धारणाएँ है।  हम आत्मछवि के अनुसार ही कर्म,व्यवहार व प्रतिक्रिया  करते है। आत्मछवि को पुरानी भाषा में आत्मविश्वास कहते है। आत्म छवि का कमजोर होना  मानसिक विकलांगता है । शारीरिक विकलांगता से बडी मानसिक विकलांगता हैं।
प्रोफेसर हाकिन्स शारीरिक रूप से अक्षम होते हुए भी विश्वविख्यात वैज्ञानिक हो सकते हंै तो फिर हम क्यों नहीं जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं ? निश्चय ही हम जीवन में इच्छित सफलता को प्राप्त कर सकते हैं। यदि सूरदास अन्धे होकर हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि हो सकते हंै; सुधाचन्द्रन, हिन्दी फिल्म “नाचे मयूरी” की हीरोइन, अपनी नकली टाँग से भी सफल नृत्य कर सकती है, तो हम क्यों नहीं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते ?
शारीरिक अक्षमता एक यथार्थ है। अधिकतर असफल व्यक्ति वे हैं जिनका मानसिक विकास सीमित होता है। ऐसे लोगों को हम मानसिक रूप से अक्षम कह सकते हैं। वे अपनी दिमागी शक्ति और क्षमता का सही दिशा में एवं सही रूप में सफलता प्राप्ति हेतु उपयोग नहीं करते । लक्ष्यहीन अपनी सफलता के दरवाजे स्वयं ही बन्द कर लेते हंै । वे स्वयं नहीं जानते, वे क्या करना चाहते हंै ? जीवन में प्रमाद, आलस्य, बुरी आदतें लक्ष्यहीन होने के कारण होती हैं। कुछ ऐसे विश्वास पाल लेते हैं कि “मैं अमुक कार्य करने योग्य नहीं हूँ,” “मैं यह नहीं कर पाऊँगा”, “मैं वह नहीं कर पाऊँगा” आदि।  ऐसे लोग बहुत अधिक है जो निरुद्देश्य जीवन जी रहे हैं।

मैं सोचता हूँ, साधनों की कमी का होना मार्ग की एक-मात्र बाधा नहीं हो सकती । मेरा विचार है कि कोई भगवान आकाश में बैठा  हमारे भविष्य को तय नहीं करता । प्रकृति अपने नियमों से काम करतीहैं।
सफलता कुछ गिने-चुने लोगों की बपौती नहीं है। आप भी, कोई भी, बिना धन और विशेष सम्बन्धों के भी इच्छित सफलता प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को इच्छित सफलता की प्राप्ति का अधिकार है और उसे प्राप्त करने की स्वाभाविक या प्रकृति-प्रदत्त शक्ति भी उसमें निहित है। आवश्यकता है अपने भीतर की शक्ति को उद्घाटित करने और उसको सही दिशा में प्रयुक्त करने की। सफलता की कोई सीमा नहीं होती। इसकी संभावनाएँ असीमित हंै; अनन्त हंै। जैसे आकाश की कोई सीमा नहीं है। आकाश अनन्त है, असीम है। कोई भी अपने भविष्य को सफलता के सूत्रों से बदल सकता है। यह आपके स्वयं के हाथ में है। अच्छी आत्मछवि के द्वारा ही हम प्रकृति से जुडते  है। अच्छी प्राकृतिक शक्तिया तभी साथ देती है।

आत्मछवि बदलकर हम अपना भाग्य बदल सकते है।जैसा कि हम जानते हैं और यह तय हैं कि हम अपने निर्माता स्वयं है। अपने भाग्य का निर्धारण हम स्वयं करते हैं। जैसी आत्मछवि हम बोएँगे, वैसा ही काटेंगे।


आपके लिए निजी सन्देश : मेरे ब्लॉग को लिखने का प्रयोजन क्या है?

November 6, 2009

यह व्यक्तित्व-विकास एवं स्व-उन्नति से सम्बन्धित ब्लाग  है।  कोई भी आपकी समस्याओं के बारे में आपसे अधिक नहीं जानता । क्योंकि स्व-उन्नति में मदद करना सबसे बड़ी मदद है। समस्याए जीवन में आती रहती हैं और हमें ही उनका समाधान खोजना पड़ता हंै।

मैं गत 35 वर्षों से स्व-उन्नति सम्बन्धी साहित्य पढ़ता रहा हूँ।  मैं अनुभव करता हूँ कि इस दिशा में मुझे गहन समझ एवं व्यापक अनुभव हंै। इससे मुझे विश्वास हुआ कि मैं एक ब्लाग सफलता प्राप्ति पर लिख सकता हूँ जो मेरे देशवासियों के, और खासकर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो।

एक सफल और असफल व्यक्ति में क्या अन्तर है ? उनमें सिर्फ एक अन्तर होता है।  सफल व्यक्ति जाने-अनजाने सफलता प्राप्ति के कुछ उपाय अपनाता है। जबकि असफल व्यक्ति उनका उपयोग नहीं करता है । प्रत्येक व्यक्ति में सफलता प्राप्ति असीमित शक्ति एवं अनन्त क्षमता की विद्यमान होती है।
एक असफल व्यक्ति अपने भीतर छिपी अनन्त क्षमताओं, असीमित शक्तियों एवं ढेर-सारी सफलता प्राप्ति की योग्यता से अवगत नहीं होता है। मनुष्य ऊर्जा का भण्डार है। वह ऊर्जा के पुंज के अतिरिक्त कुछ नहीं है। जैसा कि आधुनिक शोध बताते हंै कि एक औसत व्यक्ति अपनी उपलब्ध क्षमता का सिर्फ 5 से 8 प्रतिशत ही उपयोग करता है। यहाँ तक कहा जाता है कि विवेकानन्द एवं आईन्सटाईन जैसे विद्वान भी अपनी क्षमता का 10 प्रतिशत भाग ही उपयोग कर सके। अतः आपमें असीमित शक्ति एवं क्षमता उपलब्ध है। प्रश्न यह है कि आप अपने भीतर सुषुप्त शक्ति, क्षमता एवं स्रोतों का सफलता-प्राप्ति के लिए उपयोग कैसे करें ?

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सफलता का पथ दिखाने वाली महत्वपूर्ण पुस्तकें

November 3, 2009

मुझे प्रेरित करने वाली पुस्तकें

सफलता सम्बन्धि साहित्य आज बाजार  में बहुत आ गया हैं। यह साहित्य आपको  को उस योग्य बनाने में मदद करता हैं । मैं स्वयं ऐसा   साहित्य विगत 35 वर्षो से खोजता रहा हूँ। इस क्रम में जो  प्रेरित करने ,हिम्मत बढाने व सक्षम बनाने वाली व्यावहारिक पुस्तके मुझे मिली इनकी सूची दे रहा हूँ।

APJ Abdul Kalam                  : Wings of Fire

Dale Carnegi                           : How to Win Friends & Influence People

:How to Stop Worry and Start    Living


Deepak Chopra                     : The Seven Spiritual Laws of   Success

Kenneth Blanchard               : The One Minute Manager

and

Spencer Johnson

Napolean Hill :   Think and Grow Rich

Normen V. Peale                   : The Power of Positive Thinking

Stephen R. Covey                  : The 7 Habits of Highly Effective  People

Zig Ziglar                                  : See You at The Top

J. Krishnamurti                      : The First And Last Freedom

कृष्णामूर्ति फाउण्डेशन इण्डिया, राजघाट फोर्ट, वाराणसी

Osho                                          : Meditation The First And Last Freedom


रेबेल बुक ओशों कम्यून, पूणे

उपरोक्त  पुस्तकांे के हिन्दीअनुवाद  उपलब्धहै।

Anthony Robbins :    Awaken the Giant Within

:Unlimited Power

Simon & Schuster Inc.

1230 Avenue of the Americas, New York.

Joshpeh Murphy :    The Power of Your     Subconscious    Mind

Bantam Books, USA.

Raj Bapna                                                : Mind Power Study Technique

Mind Power Research Institute, Mind   Chambers,    Udaipur

Win Wenger :  The Einstein Factor
Prima Publishing, California.

सफलता सम्बन्धि आप भी इसमें अपने अनुभव के आधार पर पुस्तको सम्बधि सुझाव दे सकते हैं।


अमेरिकी प्रसिद् प्रेरक गुरु जिग जिगलर की कृति `शिखर पर मिलेगे`

October 30, 2009

zig

See you at The Top का हिंदी अनुवाद प्रकाशक :मंजुल पब्लिशिंग कीमत ;१५० रु

सफलता के शिखर पर चढने का मार्ग क्या हैं?

उठो ! जागो! लिखने के क्रम में कुछ प्रमुख प्रेरक गुरूओं का साहित्य पढने का अवसर मिला कई किताबे उनमे से आज भी सार्थक लगती है।सफलता प्राप्ति हेतू 20सहायक पुस्तकों की सूची जो मेंने उठो जागो में दी हैं उसमें से  प्रत्येक की समीक्षा करने का मन है।  उनमें से जिग जिगलर की कृति शिखर पर मिलेगे अच्छी लगी थी । जिगलर अमेरिका के बहुत प्रसिद्व प्रेरक गुरू हैं। आप अपने अनुभव से बोलते हैं। इसलिए व्यावहारिक हैं।वास्तव में यह सफलता प्राप्ति हेतु एक पाठ्य पुस्तक हैं।यह किताब  बातचीत ,कार्यानुभव पर सरल शैली में लिखी हुई है ।इस किताब ने मुझे कहां छुआ व  किस तरह छूआ जिसकी चर्चा करना चाहता हूॅ।

इस पुस्तक में सफलता प्राप्ति हेतु मुख्यतः छः विषयो के बारे में लिखा है। इस में शिखर पर  चढने  के लिए छः सोपान बताए हैं। आत्म छवि ,दूसरो के साथ आपका रिस्ता ,ध्येय , नजरिया ,कार्य और इच्छा। आत्मविश्वास से आत्मछवि बनती हैं। हिन भावना के होने पर सफलता नही पाई जा सकती है। सफलता पाने  हेतु रिश्ते भी सहायक हैं। ध्येय के बिना मंजिल नही मिलती हैं। सकारात्मक नजरिये की भी सफलता प्राप्ति में अहम् भूमिका हैं। सफलता का आधार कर्म यानि कार्य ही तो हैं।ज्वलन्त  इच्छा के बिना प्रयत्न सम्भव नही हैं।इस तरह इन छः ही मुख्य बातो को ध्यान में रखने के लेखक ने  अनेेक उपाय बताए हैं।
शिखर पर मिलेंगे  एक दर्शन है,परन्तु इसमें कुछ सिद्वान्त शामिल हैं। ये विचार ,कार्यविधियां ,एवं तकनीक एक पुरा जीवन जी लेनंे  से आती हैं। इसमें तीस वर्ष का सेल्स व मानव  विकास  का अनुभव ,साथ ही साथ जीवन के लगभग सभी क्षे़त्रों से जुडे विश्व के उच्च व्यावसायिक लोगो से व्यक्तिगत लगाव शामिल हैं।

जिग-जिगलर की निम्न बातो के साथ इसे पुरा करना चाहुगाँ।
आदमी की अभिकल्पना  उपलब्धि के लिए की गयी थी , उसका निर्माण सफलता के लिए किया गया, और उसे महानता के बिज सहायता के लिए प्रदान किये गये।


ब्लाॅग पर ट्राफिक और टेढ़ी खीर

October 26, 2009

ब्लाॅग पर ट्राफिक बढ़ाना टेढ़ी खीर है। इ़स पर मुझे टेढ़ी खीर  नामक एक कहानी  याद आती है।
जीवन भर हम सफ़लता के लिए लालायित रहते हैं  परन्तु कुछ ज्ञात-अज्ञात कारणों से हम आंशिक सफ़लता ही प्राप्त कर पाते हैं। ऐसा ही एक कारण है “नासमझी”।

दो गरीब लड़के थे, जो भीख माँगा करते थे। उनमें से एक जन्मान्ध था और दूसरा उसे सहयोग किया करता था।
एक दिन अन्धा लड़का बीमार हो गया। उसके साथी ने कहा “यहीं ठहरो और विश्राम करो। मैं जाकर हम दोनों के लिए माँग कर लाता हूँ।’’
उस दिन, उस लड़के को बहुत स्वादिष्ट भोजन “खीर” भीख में मिली। परन्तु उसके पास लाने हेतु कोई बर्तन न था इसलिए उसने वहीं सारी खीर खा ली।
लौटकर उसने अपने अन्धे साथी से कहा, ‘‘ मुझे क्षमा करना भाई! आज मुझे भीख में खीर मिली थी। परन्तु मैं उसे तुम्हारे लिए न ला सका, क्योंकि उसे लाने के लिए मेरे पास बर्तन नहीं था।’’
अन्धे लड़के ने पूछा, “यह खीर क्या होती है ?” “अरे यह सफ़ेद होती है, दूध सफ़ेद होता है।” अन्धा लड़का समझा नहीं सका। चूंकि वह जन्म से अन्धा था।  उसने पूछा “यह सफ़ेद क्या होता है?” “तुम नहीं जानते, सफ़ेद क्या होता है?”
“नहीं! मैं नहीं जानता।”
“यह काले का विलोम होता है।”
उसने पूछा, “अच्छा, यह काला क्या होता है।” वह यह भी नहीं जानता था कि काला क्या होता है।
‘‘अरे, समझने की कोशिश करो, सफ़ेद को।” अन्धा लड़का बिल्कुल नहीं समझ पाया कि सफ़ेद क्या होता है। अतः उसके मित्र ने इधर-उधर दृष्टि दौड़ाई और ऐसा संकेत ढूँढने की कोशिश की कि जिसका उदाहरण देकर अंधे मित्र को “सफ़ेद” के बारे में समझा सके।  इतने में उसे एक सफ़ेद बगुला दिखाई दिया। उसने बगुले को पकड़ कर अन्धे मित्र से छुआते हुए समझाया कि सफे़द इस चिड़िया जैसा होता है।
अन्धे ने बगुले को छुआ, उस पर हाथ फिराया और कहा, “अरे यह तो मुलायम है। सफ़ेद मुलायम होता है।”
“नहीं, नहीं, इसका मुलायम होने से कुछ लेना देना नहीं है। सफ़ेद, सफ़ेद होता है। समझने की कोशिश करो।“
“परन्तु तुमने कहा कि ‘सफ़ेद’ इस बगुले जैसा होता है।” यह कहते हुए अन्धे लड़के ने बगुले पर फिर से हाथ फिराया – आगे से पीछे, ऊपर से नीचे – और कहा “अच्छा, यह टेढ़ा होता है।” अब समझा, खीर टेढ़ी होती है।
अन्धा लड़का तब भी समझ नहीं पाया कि “सफ़ेद” क्या होता है। क्योंकि, उसे यह समझने, जानने के लिए जिन चक्षुओं की आवश्यकता थी, वह दृष्टि उसके पास नहीं थी।
इसी भाँति अन्धे लड़के की तरह हम कई बार जीवन को सही रूप से समझ नहीं पाते, जबकि हम हमेशा सफलता-प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहते हंै।
तथ्यों पर आधारित हमारी समझ का एक स्तर होता हंै। समस्या वहाँ खड़ी होती है जहाँ हम सोचतें हंै कि हम सही है,ं जबकि कई बार ऐसा होता नहीं है। ऐसी स्थिति में हम सोचते हैं, कठोर प्रयास करने पर भी हमें सफलता नहीं मिल रही है। हम लक्ष्य-प्राप्ति के लिए क्या करें ?

इस उत्तर की खोज आपको अपने ब्लाग पर ट्राफिक बढाएगी।


सफलता की ऊँचाई हमारी मनोवृती की उज्जवलता पर निर्भर हैं

October 23, 2009

हम जैसा सोचते हैं वैसे ही हैं।
यदि सोचते हैं कि हम पराजित हैं, तो हम पराजित हैं।
यदि सोचते हैं कि हममें साहस नही हैं,तो नही हैं।
यदि हम जीतना चाहते हैं
परन्तु सोचते हैं कि नहीं जीत सकते ,
तो यह निश्चित है कि हम नही जीत सकते हैं।
attitude-scaleयदि  हम सोचते हैं कि हम हारेगें तो हारे हुए हैं।
इस पुरी दुनिया में जैसा कि हम देखते हैं,
सफलता चाहने वाले की इच्छा शक्ति पर निर्भर है।
सफलता मन की एक अवस्था हैं।
यदि सोचते है कि हम दूर हैं,तो दूर है।
वृहत सफलता के लिये वृहत सोचना पडेगा ।
किसी भी प्राप्ति केे पूर्व आपको आश्वस्त होना पडता हैं
तभी हम  जीत पाते हैें।
जीवन के युद्व में विजय सदैव उसे नही मिलती
जो सबसे मजबूत ,तेज अथवा बुद्विमान है
जीतता तो वह है
जो सोचता है कि वह जीत सकता हैं।